किन्नू-लीची पर मौसम की मार! तेज गर्मी से बढ़ा नुकसान, किसानों के लिए PAU की अहम सलाह

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने किसानों को चेताया है कि तेज गर्मी और कम नमी से किन्नू, आम, लीची, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसी फलदार फसलें प्रभावित हो सकती हैं. विशेषज्ञों ने नियमित सिंचाई, व्हाइटवॉश, मल्चिंग और विंडब्रेक अपनाने की सलाह दी है, ताकि उत्पादन और फलों की गुणवत्ता को नुकसान से बचाया जा सके.

Kisan India
नोएडा | Published: 27 Jul, 2026 | 09:11 AM

Horticultural Crop Losses: तेज गर्मी और कम नमी का असर अब फलदार फसलों पर भी दिखने लगा है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विशेषज्ञों ने किसानों को चेतावनी दी है कि अगर इस मौसम में बागों की सही देखभाल नहीं की गई, तो किन्नू, लीची, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसी फसलों की पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसलिए किसानों को समय पर सिंचाई और फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा मौसम का सबसे ज्यादा असर किन्नू, आम, लीची, नाशपाती, आड़ू, प्लम और अन्य फलदार फसलों पर पड़ सकता है, जो इस समय फल देने की अवस्था में हैं.

PAU के वैज्ञानिकों का कहना है कि तेज गर्मी के कारण पौधों से पानी तेजी से निकलता है, जिससे सिंचाई की जरूरत  बढ़ जाती है. खासकर नए लगाए गए पौधों पर सबसे ज्यादा खतरा होता है, क्योंकि उनकी जड़ें पूरी तरह विकसित नहीं होतीं. ऐसे में पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर पौधे सूख भी सकते हैं. विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे नियमित सिंचाई करें और बागों की लगातार निगरानी रखें, ताकि गर्मी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

नींबू और लीची जैसी फसलों पर ज्यादा असर

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) की फल विशेषज्ञ मनवीन कौर ने द ट्रिब्यून से कहा कि तेज धूप और अत्यधिक गर्मी  का असर सबसे ज्यादा बारहमासी नींबू और लीची जैसी संवेदनशील फसलों पर पड़ रहा है. इन फसलों में फल झड़ने, फल फटने और धूप से झुलसने की समस्या बढ़ रही है. खासकर पेड़ों के दक्षिणी हिस्से पर धूप का असर ज्यादा दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पेड़ों की छाल सूखने लगती है, पत्तियां झड़ने लगती हैं और फल भी खराब हो सकते हैं.

मुख्य तने पर तेज धूप का सीधा असर पड़ता है

वहीं, PAU के पौध रोग विशेषज्ञ जगदीश कुमार अरोड़ा ने कहा कि जिन पौधों का फैलाव (कैनोपी) कम होता है, उनके मुख्य तने पर तेज धूप  का सीधा असर पड़ता है. अधिक तापमान और कम नमी के कारण तने की छाल फट सकती है, पत्तियां गिर सकती हैं और पौधे सूखने तक की नौबत आ सकती है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि फलदार पेड़ों की समय पर देखभाल नहीं की गई, तो किन्नू में समय से पहले फल गिरने और अन्य फलों के पेड़ों में छाल फटने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. उनका कहना है कि अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के लिए गर्मियों में फसलों की विशेष देखभाल जरूरी है. थोड़ी सी लापरवाही भी किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है.

10 दिन पर ताजा पानी से सिंचाई करें

PAU के विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि बढ़ती गर्मी के असर को कम करने के लिए हर 10 दिन में अच्छी गुणवत्ता वाले पानी से सिंचाई करें. पर्याप्त सिंचाई नहीं होने पर किन्नू में समय से पहले फल झड़ सकते हैं, जबकि आड़ू और प्लम के फलों का आकार छोटा रह सकता है और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है. पौध रोग विशेषज्ञ जगदीश कुमार अरोड़ा ने कहा कि प्रताप, शान-ए-पंजाब और अर्ली ग्रांडे जैसी जल्दी पकने वाली आड़ू की किस्मों में हर 3-4 दिन पर सिंचाई करनी चाहिए. वहीं, प्लम में 4-5 दिन और नाशपाती में सप्ताह में एक बार सिंचाई करना बेहतर रहता है.

 

 

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