बैंगन फसल पर कीटों का हमला, समय पर बचाव नहीं किया तो घट सकती है 50 फीसदी तक उपज

बैंगन की खेती में कुछ कीट किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन रहे हैं. इनके कारण पौधों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन पर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और सही प्रबंधन अपनाकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है. जानिए कौन से उपाय सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं.

Saurabh Sharma
नई दिल्ली | Updated On: 27 Jul, 2026 | 07:10 AM

Brinjal Farming: बैंगन की खेती में कीटों का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. तना एवं फल छेदक कीट, माहू और सफेद मक्खी जैसे कीट फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. यदि इनका समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को फसल की नियमित निगरानी और समेकित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर नुकसान से बचना चाहिए.

तना और फल छेदक कीट से सबसे ज्यादा नुकसान

कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, बैंगन की फसल  में तना एवं फल छेदक कीट सबसे अधिक हानि पहुंचाता है. यह कीट पहले पौधों के तनों में छेद कर उन्हें कमजोर करता है. इसके बाद फल के अंदर प्रवेश कर उसे भीतर से नुकसान पहुंचाता है. प्रभावित फल देखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो जाते हैं. ऐसे फलों की बाजार में मांग कम रहती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

नियमित निगरानी और संक्रमित भागों को हटाना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को रोजाना खेत  का निरीक्षण करना चाहिए. यदि किसी पौधे की टहनी सूखी, मुरझाई या संक्रमित दिखाई दे तो उसे तुरंत काटकर खेत से बाहर नष्ट कर देना चाहिए. इसी प्रकार कीट प्रभावित फलों को भी समय रहते हटाना जरूरी है. इससे कीटों का प्रसार रुकता है और स्वस्थ पौधों को सुरक्षित रखा जा सकता है. नियमित निगरानी से कीटों की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव होती है, जिससे नियंत्रण आसान हो जाता है.

खेत की सफाई और फेरोमोन ट्रैप का महत्व

कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार बताते हैं कि खेत में खरपतवार अधिक  होने पर कीट तेजी से बढ़ते हैं. इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई कर खेत को साफ रखना आवश्यक है. साफ-सुथरे खेत में पौधों का विकास बेहतर होता है और कीटों का प्रकोप भी कम रहता है. कीट नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप एक प्रभावी उपाय माना जाता है. इन ट्रैपों में नर कीट आकर्षित होकर फंस जाते हैं, जिससे उनकी संख्या कम होती है और प्रजनन चक्र प्रभावित होता है. विशेषज्ञ प्रति एकड़ 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह देते हैं. यह तरीका रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने में भी मदद करता है.

नीम आधारित उपाय और दवा का सही इस्तेमाल

कीट नियंत्रण के लिए नीम तेल का उपयोग  भी लाभकारी माना जाता है. किसान 5 मिली नीम तेल को एक लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव कर सकते हैं. यह उपाय कीटों की संख्या कम करने के साथ-साथ फसल और मिट्टी दोनों के लिए सुरक्षित रहता है. यदि कीटों का प्रकोप अधिक बढ़ जाए तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए. दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना अधिक प्रभावी माना जाता है. तेज धूप में छिड़काव करने से दवा का असर कम हो सकता है.

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Published: 27 Jul, 2026 | 06:00 AM