बढ़ते तापमान ने खेती की कमर तोड़ी.. टमाटर, मिर्च और बैंगन की फसलें पर बुरा असर

Heat Stress Crop Damage: बढ़ती गर्मी और 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान के कारण खेतों में फसलें हीट स्ट्रेस का शिकार हो रही हैं. इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां मुरझाने लगती हैं और उत्पादन में गिरावट आती है. यह समस्या अब किसानों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 14 May, 2026 | 04:38 PM

Heat Stress In Plants: तेज होती गर्मी अब सिर्फ मौसम की खबर नहीं रह गई है, बल्कि सीधे खेतों में तबाही का कारण बनती जा रही है. 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचते ही कई इलाकों में सब्जियों और अन्य फसलों की हालत बिगड़ने लगी है, पत्तियां मुरझा रही हैं, पौधों की बढ़वार रुक गई है और उत्पादन पर सीधा असर दिख रहा है. इस बढ़ते खतरे को ही हीट स्ट्रेस (Heat Stress) कहा जाता है, जो धीरे-धीरे किसानों की मेहनत और फसल दोनों को कमजोर कर रहा है.

हीट-स्ट्रीस क्या है?

हीट-स्ट्रीस तब होता है जब तापमान सामान्य सीमा से ज्यादा हो जाता है और पौधे उस गर्मी को सहन नहीं कर पाते. आमतौर पर 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान फसलों के लिए नुकसानदायक माना जाता है. इस स्थिति में पौधों में पानी की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.

हीट-स्ट्रीस के मुख्य कारण

हीट-स्ट्रीस के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे:

  • लगातार बढ़ता तापमान और तेज गर्म हवाएं
  • मिट्टी में नमी की कमी
  • असंतुलित पोषण और कम सिंचाई
  • तेज धूप के लंबे समय तक संपर्क में रहना
  • बदलता जलवायु पैटर्न

इन कारणों की वजह से पौधों पर तनाव बढ़ जाता है और उनकी वृद्धि रुक जाती है.

कौन-कौन सी फसलें ज्यादा प्रभावित होती हैं?

हीट स्ट्रेस का असर कई फसलों पर साफ देखा जा सकता है, खासकर टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, करेला और अन्य सब्जी वाली फसलों पर. तेज गर्मी के कारण इन पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फलों का आकार छोटा रह जाता है. साथ ही, फलों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन और बाजार मूल्य दोनों में कमी आ सकती है.

हीट-स्ट्रीस के लक्षण

किसानों को इन लक्षणों पर खास ध्यान देना चाहिए, पत्तियों का पीला पड़ना या मुरझाना, पौधों की बढ़वार का रुक जाना, मिट्टी में नमी की कमी, फूल और फलों का गिरना तथा पौधों में स्पष्ट रूप से कमजोरी दिखाई देना. ये सभी संकेत हीट स्ट्रेस की ओर इशारा करते हैं और समय रहते पहचान जरूरी है ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

फसलों को बचाने के लिए कुछ जरूरी कदम

  • समय पर पानी दें और मिट्टी को सूखने न दें
  • खेत में सूखी घास या पुआल बिछा दें ताकि नमी बनी रहे
  • तेज धूप से बचाने के लिए पौधों को हल्की छाया में रखें या शेड नेट लगाएं
  • गोबर की खाद या जैविक खाद का इस्तेमाल करें
  • पत्तों पर पोटाशियम और अमीनो एसिड का हल्का छिड़काव करें
  • पानी सुबह या शाम के समय दें ताकि पानी जल्दी सूखे नहीं

हीट-स्ट्रीस एक गंभीर कृषि समस्या बनती जा रही है, खासकर बदलते मौसम के कारण. अगर किसान समय रहते सही प्रबंधन और तकनीक अपनाएं, तो इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सही देखभाल और जागरूकता से फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है और उत्पादन में गिरावट को रोका जा सकता है.

 

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