MSP Hike: केंद्र सरकार द्वारा खरीफ सीजन की 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किए जाने के बाद किसान संगठनों और किसान नेताओं ने नाराजगी जताई है. किसानों का कहना है कि सरकार ने MSP में जो बढ़ोतरी की है, वह खेती की लगातार बढ़ती लागत के मुकाबले बहुत कम है. खासकर मक्का और मूंग जैसी फसलों के MSP में मामूली बढ़ोतरी को लेकर किसानों में गुस्सा दिखाई दे रहा है. किसान नेताओं का कहना है कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और कृषि मशीनरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन किसानों की फसलों का मूल्य उसी हिसाब से नहीं बढ़ाया जा रहा. उनका आरोप है कि MSP बढ़ोतरी को सरकार बड़ी उपलब्धि बताकर प्रचार कर रही है, जबकि जमीन पर किसानों को उसका फायदा नहीं मिल रहा.
CACP को बताया किसान विरोधी
भारतीय किसान यूनियन के किसान नेता गुणी प्रकाश (Guni Prakash) ने MSP बढ़ोतरी पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP किसानों के हित में काम नहीं कर रहा, बल्कि उपभोक्ताओं के हित को प्राथमिकता दे रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने मक्का का MSP केवल 10 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग का 12 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है, जो किसानों के साथ मजाक है. गुणी प्रकाश ने कहा कि आज मक्का खाने, पशु चारे और एथेनॉल उत्पादन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रही है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा. उन्होंने कहा कि 2014 में डीजल करीब 45 रुपये लीटर था, जो अब लगभग 95 रुपये तक पहुंच गया है. मजदूरी भी 100-150 रुपये से बढ़कर 600-700 रुपये प्रतिदिन हो गई है. इसके अलावा खाद, दवाइयों और बीज के दाम भी कई गुना बढ़ चुके हैं. ऐसे में MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगी.
MSP सिर्फ कागजों तक सीमित
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार MSP घोषित तो करती है, लेकिन ज्यादातर मंडियों में किसानों को वही रेट नहीं मिलता. गुणी प्रकाश ने कहा कि कई राज्यों में गेहूं और धान MSP से कम कीमत पर बिक रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान अपनी गेहूं हरियाणा में बेचने के लिए पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें MSP से कम दाम मिल रहे हैं. इसी तरह धान की खरीद भी कई जगह 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक हो रही है. उन्होंने कहा कि MSP का फायदा किसानों की बजाय मंडी के दलालों, एजेंटों और खरीद एजेंसियों को ज्यादा मिल रहा है. उनका कहना है कि सरकार को किसानों के लिए खुला बाजार देना चाहिए ताकि किसान अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी फसल बेच सकें और उन्हें बेहतर दाम मिल सके.
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नेता सरवण सिंह पंधेर ने सरकार पर साधा निशाना
किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के नेता सरवन सिंह पंधेर (Sarwan Singh Pandher) ने कहा कि केंद्र सरकार MSP बढ़ाने के नाम पर सिर्फ प्रचार कर रही है. उन्होंने कहा कि पंजाब में मुख्य रूप से केवल धान और गेहूं की सरकारी खरीद होती है, जबकि दालों, तिलहनों और मक्का जैसी फसलों की MSP पर गारंटी खरीद नहीं होती. सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पिछले छह महीनों में खेती की लागत 6 फीसदी से 12 फीसदी तक बढ़ चुकी है, लेकिन MSP में बढ़ोतरी बहुत कम की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार की नीति किसानों की वास्तविक लागत के अनुसार नहीं दिखाई देती. उन्होंने कृषि विश्लेषक देविंदर शर्मा का हवाला देते हुए कहा कि 1970 के मुकाबले खेती से जुड़ी लागत सैकड़ों गुना बढ़ चुकी है, लेकिन किसानों की फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े.
स्वामीनाथन आयोग लागू करने और MSP गारंटी कानून की मांग
किसान संगठनों ने सरकार से एम. एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि MSP तय करते समय C2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़ा जाना चाहिए. किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब ने मांग की कि सभी 23 फसलों की MSP पर कानूनी गारंटी दी जाए और मंडियों में सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए. किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में बड़े आंदोलन किए जाएंगे. किसानों का कहना है कि खेती लगातार महंगी होती जा रही है और अगर फसलों का सही दाम नहीं मिला तो किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा. उनका कहना है कि MSP की घोषणा तभी सफल मानी जाएगी जब किसानों को जमीन पर उसका वास्तविक लाभ मिले.