Chhatarpur Violence: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ढोडन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा. प्रशासन और पुलिस टीम अतिक्रमण हटाने तथा कुछ संरचनाओं को तोड़ने पहुंची थी, जिसका ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने विरोध किया. देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और पुलिस व प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू हो गया, जिसमें कई सरकारी वाहन और जेसीबी मशीनें क्षतिग्रस्त हो गईं. ग्रामीणों का आरोप है कि बिना उचित सूचना और पुनर्वास व्यवस्था के कार्रवाई की गई. घटना के बाद 150 लोगों पर मामला दर्ज हुआ और 12 लोगों को हिरासत में लिया गया. वहीं जय जवान जय किसान एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत ने पुलिस कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है.
अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर ग्रामीणों का हमला
जानकारी के अनुसार प्रशासनिक टीम ढोडन गांव में परियोजना से जुड़े अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना सही सूचना दिए अचानक कार्रवाई शुरू कर दी. कई लोगों का कहना है कि जब मशीनें गांव में पहुंचीं तब परिवार के सदस्य घरों के अंदर मौजूद थे. इसी बात को लेकर लोगों में गुस्सा बढ़ गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए. देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने पुलिस व प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू कर दिया. हालात इतने खराब हो गए कि अधिकारियों को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास की पूरी जानकारी नहीं मिली है. इसी वजह से इलाके में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई है.
पुलिस कार्रवाई पर संगठन का विरोध, आंदोलन की चेतावनी
जय जवान जय किसान एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत ने किसानों, ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय पर हो रही पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा की जा रही दमनकारी कार्रवाई से क्षेत्र में डर और तनाव का माहौल बन रहा है. राजपूत ने आरोप लगाया कि अपनी मांगों और अधिकारों की बात रखने वाले लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिसे संगठन बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं रुकी और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन बड़ा आंदोलन शुरू करेगा. साथ ही उन्होंने सरकार से शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग की.
पथराव में पुलिस वाहन और जेसीबी मशीन क्षतिग्रस्त
हिंसक झड़प के दौरान कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा. पथराव में एडिशनल एसपी की गाड़ी समेत पुलिस के करीब आधा दर्जन वाहनों के कांच टूट गए. अतिक्रमण हटाने में लगी जेसीबी मशीन को भी भीड़ ने नुकसान पहुंचाया. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन अचानक हुए पथराव से अफरा-तफरी मच गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें भी आई हैं, हालांकि किसी गंभीर घायल की पुष्टि नहीं हुई है. घटना के बाद पूरे गांव और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि दोबारा कोई हिंसक घटना न हो सके.
VIDEO | Chhatarpur, Madhya Pradesh: Protest against Ken-Betwa project turns violent as locals resort to stone pelting on police, administration teams during demolition drive. #MadhyaPradeshNews #KenBetwaProject
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/wN4pGoGCaE
— Press Trust of India (@PTI_News) May 14, 2026
150 लोगों पर केस, कई हिरासत में
घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार पथराव, सरकारी काम में बाधा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में करीब 150 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस अब वीडियो फुटेज, ड्रोन कैमरों और मोबाइल रिकॉर्डिंग की मदद से उपद्रवियों की पहचान कर रही है. अब तक कम से कम 12 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन का कहना है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी. वहीं गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस लगातार गश्त कर रही है. अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है.
पुनर्वास और मुआवजे को लेकर जारी है विरोध
केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Project) को लेकर क्षेत्र के कई गांवों में पहले से विरोध चल रहा है. खासकर आदिवासी समुदाय के लोग पुनर्वास और मुआवजे को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि कई प्रभावित परिवारों के नाम लाभार्थी सूची में शामिल नहीं किए गए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक पूरी जानकारी नहीं दी गई कि विस्थापन के बाद उन्हें कहां बसाया जाएगा. सरकार इस परियोजना को बड़ी नदी जोड़ योजना के रूप में देख रही है, जिससे पानी और सिंचाई की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन दूसरी तरफ प्रभावित गांवों के लोग अपने घर, जमीन और आजीविका को लेकर चिंता में हैं. फिलहाल प्रशासन गांव में शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर अब भी विरोध पर डटे हुए हैं.