देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर सख्ती करने के लिए केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में बड़ा कानून लाने जा रही है. पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 संसद में पेश किया जाएगा. इस विधेयक में पेपर लीक, नकल और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से ज्यादा कड़े प्रावधान करने का प्रस्ताव है. प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक, नकल और परीक्षा में धांधली के दोषियों को अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है. साथ ही 1 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए एक टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है.
सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद प्रतियोगी परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, ताकि ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय न हो. पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के मामले सामने आने के बाद सरकार यह कानून और सख्त बनाने जा रही है. लोकसभा में विधेयक पेश होने के बाद इस पर चर्चा होगी और फिर आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी. सरकार का कहना है कि उसने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं और वह विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.
पीएम लगातार छात्रों से सीधे संवाद कर रहे हैं
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर लगातार छात्रों से सीधे संवाद कर रहे हैं. उन्होंने हाल के दिनों में जारी अपने वीडियो संदेशों के जरिए युवाओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की है. रविवार शाम जारी अपने ताजा वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने परीक्षा सुधारों के लिए एक टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया. सरकार का मानना है कि छात्रों से सीधे संवाद और सुधारों की घोषणा के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा, साथ ही पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का भी जवाब दिया जा सकेगा.
क्या थी सरकार की प्लानिंग
संसद के मॉनसून सत्र से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब में राजनीतिक रणनीति के जरिए लोकसभा और राज्यसभा में अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी. माना जा रहा था कि सरकार संसद के अंदर विपक्ष का मजबूती से सामना करेगी. लेकिन सत्र शुरू होते ही नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया. इस विरोध प्रदर्शन ने सरकार की रणनीति को प्रभावित किया और मॉनसून सत्र का पहला सप्ताह सरकार के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार संसद के भीतर विपक्ष का सामना करने के लिए तैयार थी, लेकिन संसद के बाहर छात्रों के आंदोलन ने पूरे राजनीतिक माहौल को बदल दिया. छात्रों के विरोध ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा दे दिया.
परीक्षा सुधारों के कई कदमों का ऐलान
छात्रों के लगातार विरोध के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार किया और परीक्षा सुधारों के कई कदमों का ऐलान किया. इसे सरकार की ओर से दबाव के बीच उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है. अब सबकी नजर सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह पर है. माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों पहले से ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकते हैं.