सरसों किसानों के लिए चेतावनी! फसल बर्बाद कर देगी ये गलती, जानें White Rust बीमारी से बचने के तरीके

सरसों की बुवाई के दौरान तुलासिता रोग यानी व्हाइट रस्ट का खतरा सबसे ज्यादा होता है. किसान अगर बुवाई से पहले तीन में से किसी एक उपाय को अपना लें, तो फसल पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और उत्पादन में अच्छा मुनाफा मिलेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 9 Nov, 2025 | 06:45 AM

Mustard Cultivation : धान की कटाई के बाद खेतों में सरसों की बुवाई का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय किसान नई फसल के लिए तैयारियां कर रहे हैं, लेकिन इसी दौरान एक बड़ी चिंता रहती है- तुलासिता रोग यानी व्हाइट रस्ट की. यह रोग सरसों की जड़ों को कमजोर कर पूरी फसल को बर्बाद कर देता है. लेकिन खुशखबरी ये है कि अगर किसान बुवाई से पहले 3 में से कोई एक उपाय अपना लें, तो इस बीमारी से पूरी तरह बचाव किया जा सकता है.

क्यों जरूरी है सरसों की फसल की सुरक्षा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरसों रबी सीजन  की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसल मानी जाती है. यह कम समय में तैयार हो जाती है और उन इलाकों में भी उगाई जा सकती है जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं. गेहूं या मटर जैसी फसलों की तुलना में सरसों को बहुत कम पानी की जरूरत होती है. यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी इसे बड़े स्तर पर उगाते हैं. बाजार में सरसों की मांग  सालभर बनी रहती है, जिससे इसका दाम भी स्थिर रहता है. लेकिन एक छोटी-सी गलती किसानों के मेहनत भरे काम को चौपट कर सकती है. तुलासिता रोग सरसों की सबसे बड़ी दुश्मन बीमारियों में से एक है, जो पौधे की बढ़त को रोक देता है और बीजों की गुणवत्ता पर असर डालता है.

क्या है तुलासिता रोग और कैसे फैलता है

तुलासिता रोग को व्हाइट रस्ट भी कहा जाता है. यह एक तरह का फफूंदजनित रोग है जो पत्तियों और तनों पर सफेद या हल्के भूरे दाग के रूप में दिखाई देता है. शुरुआत में ये दाग छोटे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे फैलकर पौधे के पूरे हिस्से को प्रभावित कर देते हैं. यह रोग नमी वाले मौसम में तेजी से फैलता है और अगर इसकी रोकथाम समय पर न की जाए तो पूरी फसल नष्ट हो सकती है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एक बार रोग लग जाने के बाद उसका इलाज मुश्किल हो जाता है. इसलिए रोकथाम ही इसका सबसे अच्छा उपाय है.

बुवाई से पहले करें मृदा और बीज उपचार

किसान अगर फसल को इस रोग से सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो बुवाई से पहले मृदा उपचार (Soil Treatment) और बीज उपचार  (Seed Treatment) जरूर करें. मृदा उपचार के लिए खेत की मिट्टी में ट्राइकोडर्मा या कार्बेंडाजिम पाउडर का छिड़काव किया जा सकता है. इससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक जीवाणु खत्म हो जाते हैं. बीज उपचार के लिए 1 किलो सरसों के बीज में 1 ग्राम कार्बेंडाजिम (Carbendazim) और 2 ग्राम थीरम (Thiram 75% WS) अच्छी तरह मिलाकर बीजों को सुखाएं. यह प्रक्रिया फफूंद और रोगों से बीजों की रक्षा करती है और अंकुरण को बेहतर बनाती है.

उन्नत किस्में और सही समय पर बुवाई

नवंबर का महीना सरसों की बुवाई  के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. किसान अगर इस समय उन्नत किस्मों जैसे- पीयूएसए बोल्ड, वरुणा, अशिरवात या आरएच-749- का चयन करते हैं, तो बेहतर उत्पादन मिल सकता है. ध्यान रहे कि बीजों की बुवाई 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर करें और फसल में जलभराव न होने दें. जलभराव से तुलासिता रोग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

तुलासिता रोग से बचाव के 3 असरदार उपाय

  • मृदा उपचार:- खेत की मिट्टी में कार्बेंडाजिम या ट्राइकोडर्मा डालकर रोगाणुओं को खत्म करें.
  • बीज उपचार:- बुवाई से पहले बीजों पर थीरम और कार्बेंडाजिम का मिश्रण लगाएं.
  • फसल प्रबंधन:- सिंचाई कम करें, खेत में जलभराव न होने दें और पौधों की नियमित निगरानी करें.

अगर किसान इन तीन में से किसी एक उपाय को भी सही ढंग से अपना लेते हैं, तो तुलासिता रोग से पूरी तरह बचाव संभव है. इससे फसल न सिर्फ स्वस्थ रहती है बल्कि उत्पादन में भी 20-30 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

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Published: 9 Nov, 2025 | 06:45 AM
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