पशुपालक ध्यान दें, बिहार में क्लासिकल स्वाइन फीवर को लेकर अलर्ट जारी, राज्यभर में मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू

Classical Swine Fever: बिहार सरकार ने सूकरों को क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए राज्यभर में फ्री टीकाकरण अभियान शुरू किया है. यह अभियान 19 मई 2026 से सभी जिलों, गांवों और वार्डों में चलाया जा रहा है. टीकाकरण रोज सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाएगा.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 20 May, 2026 | 09:20 PM

Pig Vaccination Campaign Bihar: बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने सूकरों में फैलने वाली खतरनाक बीमारी ‘क्लासिकल स्वाइन फीवर’ से बचाव के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है. पशुपालन निदेशालय की तरफ से राज्य के सभी जिलों के गांवों और वार्डों में मुफ्त टीकाकरण कराया जा रहा है. इस अभियान का मकसद सूकरों को गंभीर संक्रमण से बचाना और पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करना है.

क्या है क्लासिकल स्वाइन फीवर?

क्लासिकल स्वाइन फीवर सूकरों में फैलने वाली एक बहुत खतरनाक और तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है. यह संक्रमण सूकरों की सेहत पर बुरा असर डालता है और अगर समय पर रोकथाम न की जाए, तो बड़ी संख्या में पशु इसकी चपेट में आ सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी सूकर पालन करने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा है, क्योंकि संक्रमण फैलने पर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. इसी वजह से सरकार ने समय रहते बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू किया है.

राज्यभर में चलाया जा रहा विशेष अभियान

पशुपालन विभाग के मुताबिक, यह टीकाकरण अभियान 19 मई 2026 से शुरू किया गया है. इसके तहत राज्य के सभी जिलों, गांवों और वार्डों में सूकरों को मुफ्त में टीका लगाया जा रहा है. विभाग ने टीकाकरण का समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक तय किया है. अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे ज्यादा से ज्यादा अपने सूकरों का टीकाकरण करवाएं, ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

पशुपालकों से की गई विशेष अपील

विभाग ने सभी सूकर पालकों से कहा है कि वे इस अभियान का फायदा उठाएं और अपने पशुओं को समय पर टीका जरूर लगवाएं. अधिकारियों के अनुसार, टीकाकरण ही इस बीमारी से बचने का सबसे असरदार तरीका है. अगर सभी पशुपालक इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, तो राज्य में क्लासिकल स्वाइन फीवर के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इससे सूकर स्वस्थ रहेंगे और सूकर पालन का व्यवसाय भी मजबूत होगा.

बीमारी से बचाव क्यों है जरूरी?

सूकर पालन गांवों में रहने वाले कई परिवारों की कमाई का अहम जरिया है. ऐसे में अगर कोई संक्रामक बीमारी फैलती है, तो उसका सीधा असर उनकी आर्थिक हालत पर पड़ता है. क्लासिकल स्वाइन फीवर की वजह से सूकरों की मौत बढ़ सकती है और उत्पादन भी प्रभावित होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर टीकाकरण कराने से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं और उनकी उत्पादकता भी बनी रहती है. इसी कारण सरकार लगातार लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही है.

शिकायत के लिए जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर

पशुपालन निदेशालय ने साफ कहा है कि अगर किसी इलाके में टीकाकरण नहीं किया जा रहा है या टीका लगाने के बदले पैसे मांगे जाते हैं, तो इसकी शिकायत सीधे विभाग से की जा सकती है.

इसके लिए विभाग ने 0612-2230942 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. पशुपालक इस नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. विभाग का कहना है कि हर शिकायत पर उचित कार्रवाई की जाएगी.

जागरूकता और सहयोग से मिलेगी सफलता

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और पशुपालकों के मिलकर काम करने से ही यह अभियान सफल हो सकता है. समय पर टीकाकरण और सही जानकारी के जरिए सूकरों को इस खतरनाक बीमारी से बचाया जा सकता है. इससे पशुपालन का कारोबार मजबूत होगा और गांवों की अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा.

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Published: 20 May, 2026 | 09:20 PM

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