भिंडी की फसल पर कीटों का आतंक, तेला से सफेद मक्खी तक अपनाएं बचाव के ये 7 उपाय.. नहीं तो नुकसान तय

Bhindi Ki Kheti: भिंडी की खेती किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा जरिया है, लेकिन कीटों का प्रकोप उपज को प्रभावित कर सकता है. सफेद मक्खी, फुदका और फल छेदक कीट पौधों की पत्तियों, तनों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं. बीज उपचार, संतुलित जैविक खाद, कीट नियंत्रण और नियमित निगरानी से किसान अपनी फसल को स्वस्थ रखकर बंपर पैदावार और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 28 Feb, 2026 | 09:27 PM

Okra Farming Tips: भिंडी की खेती किसानों के लिए एक फायदेमंद विकल्प बन रही है. यह लगभग हर तरह की मिट्टी में आसानी से उगाई जा सकती है और साथ ही फसल भी जल्दी देती है. लेकिन बढ़िया उत्पादन के लिए सही देखभाल और कीट प्रबंधन बेहद जरूरी है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद के अनुसार, अगर कीट समय रहते नियंत्रित न किए जाएं, तो भिंडी की उपज और क्वालिटी दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है.

भिंडी की प्रमुख कीटें और उनका प्रभाव

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, भिंडी की फसल में कई कीटों का प्रकोप देखा जाता है, जो पौधों की पत्तियों, तनों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं.

बीज उपचार और संतुलित खेती

भिंडी की फसल में कीटों से बचाव के लिए बीज उपचार सबसे प्रभावी तरीका है. बुवाई से पहले बीजों को इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथोक्सम से उपचारित करना चाहिए. साथ ही खेत में संतुलित जैव विविधता बनाए रखें. मुख्य फसल के बीच-बीच में बेबीकॉर्न लगाना लाभकारी होता है क्योंकि यह परभक्षी कीटों को आकर्षित करता है. इसके अलावा, संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करना जरूरी है.

भिंडी के पौधों की ग्रोथ के लिए नियमित निगरानी और सही जल प्रबंधन जरूरी है. पौधों की ताजगी और कलियों की संख्या बनाए रखने के लिए मिट्टी की नमी पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर ही पानी दें.

कीट नियंत्रण के लिए असरदार उपाय

डॉ. प्रमोद के अनुसार, कीट नियंत्रण के लिए सही दवाओं का संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग जरूरी है:

इन दवाओं का सही समय पर और संतुलित उपयोग फसल को स्वस्थ बनाए रखता है और उत्पादन बढ़ाता है.

बेहतर पैदावार के लिए टिप्स

Published: 28 Feb, 2026 | 10:30 PM

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