गेहूं कटाई के बाद खाली खेत में करें इस फसल की खेती, 2 महीने में 50 हजार रुपये एकड़ तक हो सकती है कमाई!

Tips For Farmers: गेहूं और सरसों की कटाई के बाद किसान गर्मियों में मूंग की खेती कर कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. 60-70 दिनों में तैयार होने वाली मूंग खेत को खाली नहीं छोड़ती और प्रति एकड़ 30,000-50,000 रुपये तक आय देती है. दलहनी फसल होने के कारण यह मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 26 Feb, 2026 | 12:02 PM

Mung Ki Kheti: गेहूं और सरसों की फसल कटने के बाद किसान अक्सर सोचते हैं कि अब खाली पड़े खेत में क्या बोया जाए. मार्च से मई का समय संक्रमण काल माना जाता है, लेकिन सही योजना और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर इस समय को अतिरिक्त आय का सुनहरा मौका बनाया जा सकता है. गर्मियों में ऐसी फसल की जरूरत होती है जो कम समय में तैयार हो, कम पानी मांगे और बाजार में अच्छी कीमत दे. ऐसे में डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, मूंग इस समय के लिए सबसे फायदेमंद विकल्प है.

जल्दी तैयार होने वाली फसल

आईसीएआर के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि मूंग एक दलहनी फसल है जो लगभग 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. इसका मतलब है कि किसान गेहूं या सरसों की कटाई के तुरंत बाद इसकी बुवाई कर सकते हैं और खरीफ की फसल से पहले इसकी कटाई भी कर सकते हैं. कम समय में तैयार होने के कारण यह फसल खेत को लंबे समय तक खाली नहीं छोड़ती और आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन जाती है.

कम लागत में अधिक मुनाफा

यदि सही किस्म का चयन किया जाए और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाया जाए, तो प्रति एकड़ 5 से 8 क्विंटल तक मूंग का उत्पादन लिया जा सकता है. मौजूदा समय में इसका बाजार भाव 6,000 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है. इस हिसाब से किसान प्रति एकड़ लगभग 30,000 से 50,000 रुपये तक कमा सकते हैं. मूंग की खेती में सिंचाई और उर्वरक की आवश्यकता कम होने के कारण लागत भी कम आती है.

मिट्टी में सुधार का लाभ

मूंग की खेती से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. दलहनी फसल होने के कारण इसकी जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु पाए जाते हैं. ये जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में बदलकर उसकी उत्पादकता बढ़ाते हैं. इसका मतलब है कि अगली फसल के लिए मिट्टी अधिक उपजाऊ रहती है और रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है.

सफलता के लिए जरूरी बातें

मूंग की खेती में सफलता पाने के लिए सही समय पर बुवाई, संतुलित बीज दर, रोग और कीट प्रबंधन तथा समय पर सिंचाई बहुत जरूरी है. वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन करने पर नुकसान की संभावना कम और उत्पादन की संभावना अधिक होती है. अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और उचित दूरी पर बुवाई भी पैदावार बढ़ाने में मदद करते हैं.

गर्मी की मूंग केवल एक फसल नहीं, बल्कि किसानों के लिए समझदारी भरा निवेश है. यह उन्हें दोहरा लाभ देती है, नकद आय में वृद्धि और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार. गेहूं और सरसों के बाद खाली पड़े खेतों को लाभकारी बनाने का यह बेहतरीन तरीका है. थोड़ी सी योजना, सही तकनीक और समय पर प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं और अपनी खेती को टिकाऊ बना सकते हैं.

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