एक खेत में 4 फसलें उगाकर लाखों की कमाई! जानें 30 दिन में लागत वसूल करने वाली सहफसली खेती का सीक्रेट

Intercropping farming: सहफसली खेती यानी इंटरक्रॉपिंग तकनीक से किसान एक ही खेत में भिंडी के साथ मूली, पालक, धनिया और चुकंदर उगाकर आय कई गुना बढ़ा रहे हैं. फरवरी का मौसम अगेती भिंडी के लिए अनुकूल होता है और साथ लगाई गई जल्दी तैयार होने वाली फसलें 25-35 दिनों में बाजार पहुंच जाती हैं. इससे किसान एक महीने के भीतर लागत निकालकर मुनाफा कमाना शुरू कर देते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 23 Feb, 2026 | 11:33 AM

Intercropping Benefits: आज के दौर में खेती केवल पारंपरिक तरीके से करने की बजाय वैज्ञानिक और स्मार्ट तकनीकों की जरूरत है. किसान अगर एक ही खेत में एक साथ कई फसलें उगाएं, तो वे अपनी आमदनी को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं. इसके लिए मौसम, मिट्टी की क्वालिटी और सही फसल चयन बेहद जरूरी है. फरवरी का महीना खास तौर पर सब्जियों की सहफसली खेती के लिए अनुकूल माना जाता है, जिससे कम समय में बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है.

क्या है इंटरक्रॉपिंग या सहफसली खेती?

इंटरक्रॉपिंग ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही खेत में दो या अधिक फसलें एक साथ उगाई जाती हैं. इसे मल्टी क्रॉपिंग या कंपैनियन क्रॉपिंग भी कहा जाता है. इस तकनीक में मुख्य फसल की कतारों के बीच जल्दी तैयार होने वाली फसलें बोई जाती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि किसी कारण एक फसल को नुकसान हो जाए, तो दूसरी फसल से आय सुनिश्चित रहती है. इससे बाजार के उतार-चढ़ाव और मौसम के जोखिम से भी बचाव होता है.

फरवरी में अगेती भिंडी के साथ सहफसलें

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी का मौसम अगेती भिंडी की खेती के लिए काफी उपयुक्त होता है. इस समय तापमान संतुलित रहता है, जिससे पौधों की बढ़वार तेज होती है.

भिंडी को मुख्य फसल बनाकर किसान उसके साथ मूली, पालक, धनिया और चुकंदर जैसी फसलें उगा सकते हैं. मूली को थोड़ी गहराई में बोया जाता है, जबकि पालक और धनिया सतह के पास आसानी से उग जाते हैं. इस तरह एक ही खेत में जगह का बेहतर उपयोग होता है और उत्पादन बढ़ता है.

जल्दी तैयार होने वाली फसलों का लाभ

सहफसली खेती की खासियत यह है कि इसमें ऐसी फसलों का चयन किया जाता है, जिनकी वृद्धि अवधि अलग-अलग हो.

  • मूली लगभग 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है.
  • धनिया एक महीने के भीतर कटाई के योग्य हो जाता है.
  • पालक 30 से 35 दिनों में बाजार पहुंच सकता है.
  • चुकंदर भी कम समय में उत्पादन देने वाली फसल है.

इन फसलों के जल्दी तैयार होने से किसान 30 दिनों के भीतर ही बाजार में सब्जियां बेचकर लागत निकालना शुरू कर देते हैं.

लागत कम, मुनाफा ज्यादा

एक ही खेत में तीन से चार फसलें लगाने से खेत की खाली जगह का बेहतर उपयोग होता है. इससे खरपतवार कम पनपते हैं और संसाधनों का सही इस्तेमाल होता है. सिंचाई और खाद प्रबंधन भी संतुलित तरीके से किया जा सकता है, जिससे लागत में कमी आती है. यदि किसी एक सब्जी के दाम बाजार में कम मिलें, तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई हो जाती है. यही वजह है कि कई किसान इस तकनीक को अपनाकर लाखों रुपये तक की कमाई कर रहे हैं.

क्यों अपनाएं यह तकनीक?

सहफसली खेती किसानों को स्थिर और नियमित आय का अवसर देती है. यह पद्धति जोखिम कम करती है, उत्पादन बढ़ाती है और कम समय में नकदी उपलब्ध कराती है. खासकर सब्जी उत्पादक किसान, यदि मौसम और बाजार को ध्यान में रखते हुए सही फसल संयोजन चुनें, तो एक ही खेत से कई गुना लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

बदलते कृषि परिदृश्य में इंटरक्रॉपिंग या सहफसली खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का कारगर उपाय साबित हो रही है. सही योजना और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर किसान कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 23 Feb, 2026 | 11:30 AM

आम में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला विटामिन कौन सा है?