Dairy Farming Tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही कई पशुपालक यह शिकायत करते हैं कि उनकी गाय या भैंस का दूध अचानक कम हो गया है. अक्सर इसे मौसम की मार मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन असली कारण कई बार पशुओं का असंतुलित आहार होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मियों में खान-पान का सही प्रबंधन कर लिया जाए तो दूध उत्पादन को काफी हद तक स्थिर रखा जा सकता है.
क्यों घटता है दूध उत्पादन?
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, गर्मी में तेज तापमान का सीधा असर पशुओं के पाचन तंत्र पर पड़ता है. इस मौसम में हरा चारा कम उपलब्ध होता है, जिससे पशु की भूख घट जाती है. जब पशु पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं ले पाता, तो उसका असर दूध उत्पादन पर दिखने लगता है.
गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी और तनाव भी दूध घटने का एक बड़ा कारण है. यदि समय रहते आहार में सुधार कर दिया जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है.
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कैसी होनी चाहिए संतुलित डाइट?
गर्मियों में दुधारू पशुओं के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार:
- 60 प्रतिशत हरा चारा
- 40 प्रतिशत सूखा चारा
- प्रतिदिन 50 ग्राम मिनरल मिक्सचर
- 30 से 50 ग्राम नमक
मिनरल मिक्सचर और नमक पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और शरीर में जरूरी तत्वों की कमी नहीं होने देते. सही अनुपात में चारा देने से पशु की ऊर्जा बनी रहती है और दूध उत्पादन बेहतर रहता है.
हरे चारे की कमी कैसे करें पूरी?
गर्मी के मौसम में हरा चारा उपलब्ध कराना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन कुछ विकल्पों के जरिए इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है. पशुपालक बरसीम, ज्वार और बाजरा जैसे हरे चारे का उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा साइलेज भी एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसमें पर्याप्त नमी होती है जो पशुओं को ठंडक देने के साथ-साथ उनके पोषण की जरूरतों को भी पूरा करती है.
साइलेज खासतौर पर फायदेमंद है, क्योंकि इसमें नमी होती है जो पशुओं को ठंडक देती है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देती. हरा चारा पशुओं के शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करता है.
सूखे चारे का भी रखें संतुलन
केवल हरा चारा पर्याप्त नहीं है. सूखा चारा भी उतना ही जरूरी है.
- सरसों की खली
- बिनौला
- सोयाबीन की खली
ये प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और पाचन शक्ति को मजबूत बनाते हैं. ध्यान रहे कि हरे और सूखे चारे का संतुलन बिगड़ने न पाए.
कब और कैसे खिलाएं चारा?
पहली डाइट सुबह 9 बजे से पहले देनी चाहिए, ताकि तेज धूप का असर कम पड़े. दूसरी बार चारा शाम के समय देना बेहतर रहता है. लू से बचाव के लिए थोड़ी मात्रा में गुड़ और अजवाइन देना भी लाभकारी हो सकता है. सबसे महत्वपूर्ण है पानी. एक वयस्क दुधारू पशु को दिन में 3-4 बार में 60 से 80 लीटर तक साफ और ताजा पानी पिलाना जरूरी है. पानी की कमी सीधे दूध उत्पादन को प्रभावित करती है.
गर्मी में दूध कम होना सामान्य बात है, लेकिन सही आहार और देखभाल से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और समय पर चारा देने से दुधारू पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन भी बेहतर बना रहेगा.