Dairy Cattle Health: गांव में जब दुधारू पशु अचानक सिर झटकने लगें, घबराहट दिखाएं या बार-बार पेशाब करें, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. कई बार ये लक्षण एक गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं, जिसका नाम है हाइपोमैग्नीसिमिया (Hypomagnesemia). यह बीमारी शरीर में मैग्निशियम की कमी से होती है और खासकर ज्यादा दूध देने वाली गाय-भैंस को तेजी से प्रभावित करती है. आसान शब्दों में समझें तो जब पशु के शरीर में जरूरी खनिज मैग्निशियम कम हो जाता है, तो उसकी नसों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है. इससे उसका व्यवहार बदल जाता है और हालत बिगड़ने पर जान का खतरा भी हो सकता है.
इन लक्षणों को पहचानना है जरूरी
इस बीमारी की शुरुआत हल्के लक्षणों से होती है. जैसे-बिना वजह बार-बार सिर झटकना, कराहना, चौंक जाना, बार-बार पेशाब करना या आवाज सुनकर अचानक उछल पड़ना. कई बार पशु बिना पैर मोड़े चलता है या ज्यादा उत्तेजित नजर आता है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो हालत गंभीर हो सकती है. पशु अचानक दौड़ने लगता है, पैरों को जमीन पर जोर-जोर से पटकता है और खुद पर नियंत्रण खो देता है. कुछ मामलों में वह गिर भी सकता है. इसलिए जैसे ही ऐसे संकेत दिखें, तुरंत सतर्क हो जाएं. यह समस्या खासकर वसंत और बारिश की शुरुआत में ज्यादा देखी जाती है. उस समय हरा चारा अधिक मात्रा में मिलता है, लेकिन उसमें मैग्निशियम कम होता है. ज्यादा हरा चारा खाने से शरीर में खनिज की कमी हो सकती है.
कैसे करें बचाव और सही इलाज
पशु विशेषज्ञों के अनुसार, जिन पशुओं में इस बीमारी का खतरा ज्यादा हो, उन्हें रोजाना करीब 50 ग्राम मैग्निशियम ऑक्साइड देना फायदेमंद होता है. यह एक खनिज पूरक है जो शरीर में मैग्निशियम की कमी को पूरा करता है. इसके साथ ही हरे चारे के साथ संतुलित खनिज मिश्रण देना बहुत जरूरी है. सिर्फ हरे चारे पर निर्भर रहना सही नहीं है. पशु के आहार में सूखा चारा और खनिज मिलाना जरूरी है, ताकि शरीर को पूरा पोषण मिले. अगर किसी पशु में ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो देरी बिल्कुल न करें. तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर इलाज शुरू हो जाए तो पशु पूरी तरह ठीक हो सकता है. कुछ मामलों में 24 से 48 घंटे के भीतर दोबारा दवा देने की जरूरत भी पड़ सकती है.
सावधानी ही है सबसे बड़ी सुरक्षा
हाइपोमैग्नीसिमिया से बचाव मुश्किल नहीं है, बस जागरूक रहना जरूरी है. मौसम बदलते समय खास ध्यान रखें. ज्यादा दूध देने वाले पशुओं की नियमित जांच कराएं और उनके खान-पान पर नजर रखें. पशुपालकों को चाहिए कि वे हर दिन खनिज मिश्रण देना न भूलें. छोटी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है. अगर पशु स्वस्थ रहेंगे तो दूध उत्पादन भी बना रहेगा और आय पर असर नहीं पड़ेगा. याद रखें, समय पर पहचान और सही देखभाल ही इस बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका है. जागरूक पशुपालक ही अपने पशुओं को सुरक्षित रख सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं.