पशुओं का साइलेंट किलर है थनेला रोग, एक छोटी सी लापरवाही और छिन सकती है आपकी कमाई

दुधारू पशुओं में थनेला रोग तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. यह बीमारी न केवल दूध उत्पादन घटाती है बल्कि पशु को स्थायी रूप से असमर्थ भी बना सकती है. समय रहते सावधानी और सही प्रबंधन के जरिए इस गंभीर खतरे को आसानी से टाला जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Jan, 2026 | 11:30 PM

Mastitis Disease : एक किसान के लिए उसका पशु सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य और आजीविका का सबसे बड़ा आधार होता है. सुबह की पहली किरण के साथ जब दूध की बाल्टी भरती है, तो किसान के चेहरे पर मुस्कान आती है. लेकिन सोचिए, अगर वही दुधारू पशु अचानक बीमार पड़ जाए और उसका थन हमेशा के लिए खराब हो जाए?

आजकल दुधारू पशुओं में थनेला (मैस्टाइटिस) रोग एक ऐसी ही बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है. यह बीमारी चुपके से पशु के शरीर में घुसती है और देखते ही देखते दूध के उत्पादन को खत्म कर देती है. अच्छी बात यह है कि वैज्ञानिकों ने अब इस बीमारी की जड़ पकड़ने के लिए शोध शुरू कर दिया है. आइए जानते हैं क्या है यह बीमारी और कैसे आप अपने पशुओं को इससे सुरक्षित रख सकते हैं.

वाइट सेल में छिपकर वार करता है ये दुश्मन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थनेला रोग  पैदा करने वाले बैक्टीरिया बड़े शातिर होते हैं. ये बैक्टीरिया पशु के थनों में मौजूद वाइट सेल्स (श्वेत रक्त कोशिकाओं) के भीतर जाकर छिप जाते हैं. जब पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, तब ये बाहर निकलकर हमला करते हैं और थन को संक्रमित कर देते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इन कोशिकाओं में छिपने वाले बैक्टीरिया का इलाज  ढूंढ लिया गया, तो थनेला को जड़ से खत्म करना आसान हो जाएगा. वर्तमान में लगभग 10 प्रतिशत पशु इस समस्या से जूझ रहे हैं.

इलाज से ज्यादा जरूरी है आपकी चौकसी

विशेषज्ञों का मानना है कि थनेला के 90 प्रतिशत मामलों में समाधान केवल दवाइयों में नहीं, बल्कि किसान की सावधानी में छिपा है. अक्सर शुरुआती लक्षणों को हम मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण इतना बढ़  जाता है कि थन पत्थर की तरह सख्त हो जाता है. एक बार थन खराब हुआ, तो पशु किसान के लिए किसी काम का नहीं रह जाता है और आय का जरिया बंद हो जाता है. इसलिए, अपनी आंखों को डॉक्टर बनाइए और थन में आने वाली हल्की सूजन या दूध के रंग में बदलाव को कभी हल्के में न लें.

आधा घंटा, जो बचा सकता है पशु की जान

क्या आप जानते हैं कि दूध निकालने के तुरंत बाद का आधा घंटा पशु के लिए सबसे खतरनाक होता है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूध निकालने के बाद थनों का रास्ता कुछ देर के लिए खुला रहता है. अगर पशु दूध निकालते  ही जमीन पर बैठ जाए, तो फर्श पर मौजूद गंदगी और बैक्टीरिया उसी खुले रास्ते से सीधे शरीर के अंदर चले जाते हैं. इसका समाधान क्या है? दूध निकालने के तुरंत बाद पशु के सामने हरा चारा या दाना डाल दें. खाने के लालच में पशु अगले 30-40 मिनट तक खड़ा रहेगा. बस इतनी सी तरकीब से आप अपने पशु को इस जानलेवा बीमारी से बचा सकते हैं.

स्वच्छता ही है असली वैक्सीन

थनेला से बचने के लिए किसी महंगे इंजेक्शन से ज्यादा जरूरी है सफाई. दूध निकालने से पहले और बाद में थनों को ताजे और साफ पानी से धोएं. गंदे कपड़े की जगह साफ सूती कपड़े का इस्तेमाल करें. साथ ही, पशु के नीचे का फर्श सूखा और साफ होना चाहिए. यदि आपके पास एक से अधिक पशु  हैं और कोई एक संक्रमित है, तो उसका दूध सबसे आखिर में निकालें और उसे बाकी पशुओं से अलग रखें. आपकी थोड़ी सी मेहनत पशु को दर्द से और आपकी जेब को आर्थिक नुकसान से बचा सकती है. थनेला के खिलाफ लड़ाई में आधुनिक विज्ञान और किसान की जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है. याद रखिए, स्वस्थ पशु ही समृद्ध किसान की पहचान है.

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Published: 15 Jan, 2026 | 11:30 PM

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