Dairy Development : अब पशुपालकों को सही जानकारी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. मध्य प्रदेश में पशुओं के नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर कमर कस ली है. इसके लिए न सिर्फ जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है, बल्कि अधिकारी खुद गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुपालकों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का दूसरा चरण इसी सोच का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है.
दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का दूसरा चरण शुरू
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है. बुधवार से इस अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी गई है. इस चरण में विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जिले के सभी गांवों में पहुंचकर दुधारू पशु पालने वाले पशुपालकों से सीधे संवाद करेंगे. अभियान का मकसद है कि पशुपालकों को सही समय पर सही जानकारी मिले, ताकि वे अपने पशुओं से बेहतर दूध उत्पादन कर सकें.
घर-घर जाकर दी जाएगी स्वास्थ्य
अभियान के तहत पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण और नस्ल सुधार से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जा रही है. अधिकारियों की टीम घर-घर जाकर यह बताएगी कि पशुओं को संतुलित आहार कैसे दें, बीमारियों से कैसे बचाएं और नस्ल सुधार से दूध उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है. कटनी जिले में प्रत्येक विकासखंड में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं, जो सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों, मैत्री और गौसेवकों को प्रशिक्षण दे चुके हैं. साथ ही, पशुपालकों को अन्य राज्यों के सफल दुग्ध उत्पादन मॉडल के वीडियो भी दिखाए जा रहे हैं, ताकि वे नई तकनीकों को समझ सकें.
जिला स्तर पर कंट्रोल रूम से होगी अभियान की निगरानी
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कटनी जिले में जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. इस कंट्रोल रूम से पूरे अभियान की निगरानी की जाएगी.
वेटनरी विभाग के उप संचालक डॉ. आर. के. सोनी ने बताया कि कंट्रोल रूम के माध्यम से यह देखा जाएगा कि किन गांवों में कितने पशुपालकों से संपर्क हुआ और उन्हें क्या जानकारी दी गई. अभियान की नियमित समीक्षा कलेक्टर द्वारा की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो.
शहडोल में पशुपालकों तक पहुंचेगी जानकारी
कटनी के साथ-साथ शहडोल जिले में भी दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का दूसरा चरण 17 दिसंबर से शुरू किया जा रहा है. पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप संचालक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इस चरण में जिले के 731 गांवों और 40 शहरी वार्डों के 10 हजार 347 पशुपालकों से संपर्क किया जाएगा. अभियान के दौरान पशुपालकों को पशु पोषण , स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और सेक्स सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान के फायदे बताए जाएंगे. इसके साथ ही पशुओं की टैगिंग से जुड़ी जानकारी भी एकत्र कर पोर्टल पर दर्ज की जाएगी.