Horticulture Farming: मौसम में तेजी से बदलाव आ रहा है. किसी दिन कोहरे, पाला और शीतलहर का असर देखने को मिल रहा है, तो किसी दिन आसामान में चमचाती हुई तेज धूप निकल रही है. ऐसे में रबी फसलों के ऊपर असर पड़ रहा है. ऐसे में किसानों को खास ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि इस तरह के मौसम में फसलों में रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए किसानों को ठंड से बचाने के लिए समय पर सिंचाई करनी चाहिए. साथ ही फसल को रोगों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों के सुझाए गए कीटनाशकों का ही प्रयोग करें. इससे फसल की ग्रोथ तेजी से होगी और पैदावार में उछाल आएगा. खास कर गेहूं, चना और सरसों किसानों को इस समय सतर्क रहने की जरूरत है.
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि ये समय केवल गेहूं के लिए ही खास नहीं है, बल्कि सरसों, चना किसानों को भी ध्यान देने की जरूत है. क्योंकि इस समय सरसों की फसल में झुलसा रोग, सफेद फफोला और मृदुरोमिल आसिता रोग का खतरा बना हुआ है. किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसल की नियमित रूप से निगरानी करते रहें, ताकि रोग के लक्षण समय पर पहचाने जा सकें. यदि फसल में रोग के लक्षण दिखाई दें, तो नियंत्रण के लिए 1 लीटर पानी में 2.5 ग्राम मैनकोजेब या 2.0 ग्राम रिडोमिल एमजेड-72 घोलकर छिड़काव करें. पहला छिड़काव फसल की 45 दिन की अवस्था में और दूसरा छिड़काव 55 से 60 दिन के बीच करना फसल की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन के लिए लाभकारी रहेगा.
चना किसानों के लिए धांसू फॉर्मूला
चना की फसल में जरूरत के अनुसार सिंचाई करना जरूरी है. साथ ही कीटों पर भी खास नजर रखें. यदि खेत में प्रति वर्ग मीटर 2 से 3 इल्ली दिखाई दें, तो उनके नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 50 की संख्या में टी (T) आकार की खूंटियां लगाएं. इससे पक्षी बैठकर इल्ली को खा लेते हैं और कीटों की संख्या कम हो जाती है. ऐसे में चने की फसल का विकास तेजी से होता है और पैदावार भी अच्छी होती है.
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बागवानी किसान करें ये जरूरी काम
वहीं बागवानी करने वाले किसानों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है. खासकर आम, अमरूद, नींबू और कटहल जैसे फलदार फसलों की खेती करने वाले किसानों को जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने की सलाह दी जाती है. अगर किसान चाहें, तो आम की फसल में रोगों से बचाव के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 किलोग्राम और क्लोरोइंट्रोक्नॉल 150 मिलीलीटर को 500 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं. इससे बागान में कीट नहीं लगेंगे.