गोबर से भी ज्यादा ताकतवर है यह खाद! 60 दिन में घर पर ऐसे करें तैयार, बंजर जमीन भी हो जाएगी लहलहाती
Jaivik Khad Kaise Banaye: भारत के किसानों के लिए गाय और भैंस का गोबर हमेशा से खेती का भरोसेमंद साधन रहा है. यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने और उसकी बनावट सुधारने में मदद करता है. लेकिन अब कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भेड़, बकरी और मुर्गी का मल गोबर की खाद से कहीं ज्यादा असरदार साबित हो रहा है. यह खाद पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण कमजोर और बंजर मिट्टी को भी फिर से उपजाऊ बना सकता है.

भेड़, बकरी और मुर्गी के मल में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (NPK) की मात्रा ज्यादा होती है. भेड़ के मल में नाइट्रोजन – 3%, फास्फोरस – 1% और पोटेशियम – 2% होता है. ये तत्व पौधों की तेजी से ग्रोथ, मजबूत जड़ें और उच्च उत्पादन के लिए बेहद जरूरी हैं.

इस जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की संरचना और जलधारण क्षमता को मजबूत करता है. इससे मिट्टी लंबे समय तक पोषक तत्व बनाए रखती है और पौधों को लगातार पर्याप्त पोषण मिलता है, जिससे उनका विकास स्थायी होता है.

गाय के गोबर की खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है, लेकिन भेड़-बकरी और मुर्गी की खाद ज्यादा सघन और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण फसल पर जल्दी असर दिखाती है. इसका प्रयोग करने से पौधों की ग्रोथ और उत्पादन में स्पष्ट अंतर नजर आता है.

जैविक खाद तैयार करने के लिए सबसे पहले भेड़, बकरी या मुर्गी का मल इकट्ठा करें. इसके ऊपर सूखी पत्तियां, भूसा या खेत का कचरा डालें और हल्का पानी छिड़ककर ढक दें. लगभग 40-60 दिनों में यह पूरी तरह सड़कर खाद बन जाती है, जिसे सीधे खेत में डालकर इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस प्राकृतिक खाद का सही इस्तेमाल केमिकल खाद की जरूरत को कम करता है. इससे किसान की लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है. फसल स्वस्थ और पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जिससे बाजार में उसकी मांग और कीमत भी बेहतर होती है.

इस जैविक खाद का नियमित उपयोग बंजर या कमजोर मिट्टी को दोबारा हरी-भरी बनाने में मदद करता है. पौधों को पर्याप्त पोषण मिलने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और किसान लंबे समय तक स्थायी खेती कर सकते हैं.