पश्चिम बंगाल में इस बार आलू किसानों के चेहरे पर खास खुशी देखने को मिल रही है. राज्य में 2025-26 सीजन के दौरान आलू का उत्पादन 140 से 150 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. अगर ऐसा होता है तो यह पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक पैदावार होगी. पिछले साल भी राज्य में करीब 115 लाख टन आलू उत्पादन हुआ था, जिसे बंपर फसल माना गया था. लेकिन इस बार अनुकूल मौसम और खेती के रकबे में हल्की बढ़ोतरी के कारण उत्पादन में 20 प्रतिशत से ज्यादा उछाल की उम्मीद जताई जा रही है.
पश्चिम बंगाल देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है. यहां की मिट्टी और जलवायु आलू की खेती के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है. इस बार सर्दियों के दौरान तापमान संतुलित रहा, समय पर बारिश हुई और रोग-कीटों का प्रकोप भी कम रहा. इन सभी कारणों ने मिलकर फसल को बेहतर बनाने में मदद की है.
अनुकूल मौसम और बढ़ा रकबा बना वजह
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के आलू उत्पादक जिलों में इस बार मौसम ने किसानों का पूरा साथ दिया. विशेषकर दक्षिण बंगाल के हुगली, बर्दवान और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में अच्छी फसल की रिपोर्ट सामने आ रही है. ये जिले राज्य के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्र हैं.
पिछले सीजन में करीब 5.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की गई थी. इस बार रकबे में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन असली फर्क उत्पादन क्षमता में सुधार से आया है. किसानों ने उन्नत बीजों और बेहतर कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ा है. कटाई का काम शुरू हो चुका है और यह मार्च तक जारी रहेगा.
कोल्ड स्टोरेज पर बढ़ेगा दबाव
रिकॉर्ड उत्पादन के बीच एक बड़ी चुनौती भंडारण की सामने आ सकती है. राज्य सरकार ने कोल्ड स्टोरेज संचालकों को निर्देश दिया है कि वे 1 मार्च से अपने भंडार गृह खोल दें, क्योंकि उसी दिन से आलू की लोडिंग शुरू होगी.
पश्चिम बंगाल में फिलहाल लगभग 580 कोल्ड स्टोरेज हैं और इनकी कुल भंडारण क्षमता 70 से 80 लाख टन के बीच है. जबकि उत्पादन 140-150 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब है कि बड़ी मात्रा में आलू खुले बाजार में आ सकता है या फिर भंडारण की कमी के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल लगभग 68 लाख टन आलू अतिरिक्त रह सकता है. राज्य में औसतन हर महीने करीब 6 लाख टन आलू की खपत होती है. ऐसे में अतिरिक्त उत्पादन को दूसरे राज्यों में भेजना जरूरी होगा, ताकि किसानों को उचित दाम मिल सके.
छोटे किसानों के लिए राहत की व्यवस्था
राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि हर कोल्ड स्टोरेज में 30 प्रतिशत जगह छोटे और सीमांत किसानों के लिए आरक्षित रखी जाएगी. इसका उद्देश्य यह है कि छोटे किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने के लिए बाध्य न हों. अक्सर भंडारण सुविधा न मिलने के कारण किसान तत्काल बिक्री कर देते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.
यह फैसला किसानों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, उत्पादन अधिक होने के कारण बाजार भाव पर दबाव पड़ने की आशंका भी बनी हुई है.
बाजार और व्यापार पर असर
अगर राज्य सरकार समय रहते अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा देती है, तो अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग हो सकता है. बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में बंगाल के आलू की मांग रहती है. इसके अलावा प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए भी यह अवसर हो सकता है.