आलू की खेती के बाद खेत खाली न छोड़ें, इस फसल से करें बंपर कमाई

आलू की खुदाई के बाद खेत में नमी बनी रहती है और मिट्टी भी भुरभुरी हो जाती है. यही स्थिति मक्का की अगेती किस्मों के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है. अगर सही समय पर बुवाई कर दी जाए, तो मक्का की फसल खरीफ से पहले ही तैयार हो जाती है और किसान को दो फसलों का फायदा मिल जाता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 28 Jan, 2026 | 02:54 PM

रबी सीजन में देश के कई हिस्सों में आलू की फसल की खुदाई जारी है और किसान अपने खेत खाली करते जा रहे हैं. आमतौर पर आलू की खुदाई के बाद किसान खरीफ सीजन तक खेत को खाली छोड़ देते हैं, लेकिन यह खाली समय सही योजना से कमाई का बेहतरीन मौका बन सकता है. अगर किसान चाहें, तो आलू की फसल के बाद उसी खेत में दूसरी फसल बोकर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं.

खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में अगर एक ही खेत से साल में दो या तीन फसलें ली जाएं, तो मुनाफा अपने आप बढ़ जाता है. इसी सोच के साथ अब कई किसान आलू के बाद खाली खेत में अगेती मक्का की खेती कर रहे हैं और अच्छा फायदा उठा रहे हैं.

आलू के बाद मक्का क्यों है फायदे का सौदा

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्का को आज के समय में ‘खाद्यान्न की रानी’ कहा जाता है. इसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है. मक्का का इस्तेमाल खाने, पशु आहार, स्टार्च उद्योग और एथेनॉल उत्पादन तक में होता है, जिससे इसकी बिक्री में कभी कमी नहीं आती.

आलू की खुदाई के बाद खेत में नमी बनी रहती है और मिट्टी भी भुरभुरी हो जाती है. यही स्थिति मक्का की अगेती किस्मों के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है. अगर सही समय पर बुवाई कर दी जाए, तो मक्का की फसल खरीफ से पहले ही तैयार हो जाती है और किसान को दो फसलों का फायदा मिल जाता है.

अगेती मक्का की खेती से कैसे बढ़ेगी आमदनी

अगेती मक्का की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में तैयार होना है. जहां सामान्य मक्का को पकने में ज्यादा समय लगता है, वहीं अगेती किस्में 90 से 100 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं. इसका मतलब यह हुआ कि किसान खरीफ की फसल से पहले ही मक्का बेचकर नकद आमदनी हासिल कर सकते हैं.

आजकल बाजार में हरे और सूखे दोनों तरह के मक्का की मांग अच्छी है. सही दाम मिलने पर किसान को कम लागत में अच्छी कमाई हो सकती है. कई किसान तो आलू के बाद मक्का बोकर अपने सालाना खर्च का बड़ा हिस्सा निकाल लेते हैं.

जवाहर मक्का 216 बनी किसानों की पहली पसंद

अगेती मक्का की किस्मों में जवाहर मक्का 216 को किसानों और कृषि विशेषज्ञों की ओर से खास तौर पर सुझाया जा रहा है. यह किस्म करीब 90 से 98 दिनों में पूरी तरह पक जाती है और कटाई के लिए तैयार हो जाती है. अच्छी देखभाल और अनुकूल मौसम में यह किस्म प्रति हेक्टेयर लगभग 50 से 55 क्विंटल तक की उपज देने की क्षमता रखती है.

इस किस्म की एक और बड़ी खासियत इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता है. अन्य किस्मों की तुलना में इसमें रोग और कीट लगने की संभावना कम रहती है. इसकी जड़ें मजबूत होती हैं, जिससे तेज हवा या बारिश में पौधे गिरते नहीं हैं. यही वजह है कि यह किस्म आलू के बाद बोने के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है.

कम लागत, ज्यादा मुनाफा का मौका

आलू की खेती के बाद मक्का बोने से किसान को खेत की दोबारा ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ती. इससे जुताई और सिंचाई पर खर्च भी कम आता है. अगर समय पर बुवाई कर दी जाए और खाद-पानी का सही प्रबंधन किया जाए, तो मक्का की फसल बिना ज्यादा जोखिम के अच्छी पैदावार देती है.

इस तरह किसान एक ही खेत से साल में दो फसलें लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. खाली खेत छोड़ने के बजाय अगर आलू के बाद अगेती मक्का की खेती की जाए, तो यह तरीका किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है.

सही योजना से बदलेगी खेती की तस्वीर

आज के समय में खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि समझदारी और योजना का खेल बन चुकी है. आलू की खेती के बाद खेत खाली छोड़ना नुकसान का सौदा हो सकता है. अगर किसान अगेती मक्का जैसी फसलों को अपनाएं, तो कम समय में अच्छी कमाई संभव है.

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