Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को पड़ रहा है. यह फाल्गुन मास में लगने वाला विशेष खगोलीय संयोग है और इसे वर्ष का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण माना जा रहा है. लखनऊ के ज्योतिषी, राकेश पांडे बताते हैं कि, इस दिन पूर्वा फाल्गुनी और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग रहेगा. सुबह 07:27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, उसके बाद पूरे दिन उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. साथ ही धृति योग का भी निर्माण हो रहा है, जो इस दिन को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है.
भारत के कुछ हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल मान्य रहेगा. इसी वजह से इस बार होलिका दहन और रंगों की होली की तारीख को लेकर लोगों के बीच काफी कंफ्यूजन भी है.
होली कब मनाई जाएगी?
ज्योतिषी राकेश पांडे के अनुसार ग्रहण और सूतक को ध्यान में रखते हुए 3 मार्च को रंग खेलने की परंपरा नहीं निभाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार 4 मार्च को होली खेलना शुभ रहेगा. इसलिए 4 मार्च को जब लोग होली मनाएंगे, उस दिन चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा. इस प्रकार, होली के उत्सव की तिथि तय करते समय धार्मिक मान्यताओं और ग्रहण काल दोनों को ध्यान में रखा गया है.
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चंद्र ग्रहण का समय और ‘ब्लड मून’
चंद्र ग्रहण दोपहर 03:21 बजे से शुरू होकर शाम 06:47 बजे तक रहेगा. ग्रहण का स्पर्श लगभग 03:20 बजे होगा और मोक्ष 06:47 बजे माना गया है. इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है. यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए धार्मिक दृष्टि से इसका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सूतक काल कब से लगेगा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है. इस गणना के आधार पर 3 मार्च की सुबह करीब 09:39 बजे से सूतक लग जाएगा. सूतक काल में शुभ कार्य, पूजा-पाठ की विशेष विधियां, नए कार्यों की शुरुआत और उत्सव मनाना वर्जित माना जाता है. कई लोग इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखते हैं और भोजन ग्रहण करने से भी परहेज करते हैं.
किन राशियों पर अधिक प्रभाव?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण का असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है. हालांकि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य करना सकारात्मक परिणाम दे सकता है. गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. ग्रहण को लेकर अलग-अलग मत और मान्यताएं हैं. कुछ लोग इसे केवल खगोलीय घटना मानते हैं, तो कुछ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं. इसलिए आस्था और विज्ञान दोनों को संतुलित नजरिए से देखने की जरूरत है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं. Kisan India इनकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं किया जाता. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें.