बकरीद पर मंडियों में नहीं बिक रहे बकरे, व्यापार में भारी मंदी से करोड़ों का नुकसान

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की कई पशु मंडियों में इस बार रौनक गायब दिखाई दे रही है. बड़े पशुओं की खरीद कम होने से व्यापारियों और पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई बाजारों में खरीदार कम आने से पशुओं के दाम गिर गए हैं और करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 26 May, 2026 | 06:22 PM

Bakrid Market Slowdown: बकरीद में अब सिर्फ दो दिन बाकी हैं, लेकिन इस बार देश की कई पशु मंडियों में त्योहार वाली चहल-पहल गायब नजर आ रही है. पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक बड़े पशुओं की खरीद में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. व्यापारियों का कहना है कि सरकारी सख्ती, बढ़ती महंगाई और कानूनी डर की वजह से लोग बड़े पशु खरीदने से बच रहे हैं. इसका सीधा असर पशु व्यापारियों और किसानों की कमाई पर पड़ा है. कई मंडियों में हालत ऐसे हैं कि लाखों रुपये खर्च कर पशु पालने वाले व्यापारी अब उन्हें उचित दाम पर बेच भी नहीं पा रहे हैं.

महाराष्ट्र की कलामना मंडी में छाई मंदी

महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कलामना बकरी मंडी में भी इस बार त्योहारों वाली रौनक दिखाई नहीं दे रही. व्यापारियों के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार पशुओं के दाम  काफी कम मिल रहे हैं. व्यापारी मनोज ने ANI से कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद खरीदार कम आ रहे हैं, जिससे प्रति पशु कम से कम पांच हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है. उन्होंने बताया कि कुर्बानी में अब बहुत कम समय बचा है, लेकिन बाजार में खरीदारी की रफ्तार नहीं बढ़ रही. एक अन्य व्यापारी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि वह पिछले दस से पंद्रह वर्षों से इस कारोबार में हैं, लेकिन ऐसा कमजोर बाजार पहले कभी नहीं देखा. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले साल की तुलना में प्रति पशु कम से कम 5,000 रुपये का अंतर है.

बाहरी पशुओं की एंट्री से बढ़ी परेशानी

स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि बाहर के राज्यों से बड़ी संख्या में पशु लाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय पशुपालकों को नुकसान  उठाना पड़ रहा है. व्यापारियों के मुताबिक दलाल कम दाम पर बाहर से पशु खरीदकर बाजार में बेच रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय पशुओं की कीमतें गिर गई हैं. इसका असर छोटे पशुपालकों पर सबसे ज्यादा पड़ा है. कई किसानों ने कर्ज लेकर पशु पाले थे, ताकि बकरीद के समय उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सके. लेकिन कमजोर मांग और घटती कीमतों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

करोड़ों के कारोबार पर संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति रही तो पशु व्यापार से जुड़े हजारों छोटे व्यापारियों और किसानों की आर्थिक हालत और खराब हो सकती है. बकरीद के दौरान हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, लेकिन इस बार कई मंडियों में सन्नाटा पसरा हुआ है. व्यापारियों का कहना है कि अगर अगले साल भी यही हाल रहा तो बहुत से लोग इस कारोबार को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे. फिलहाल बाजार में खरीदारों की कमी और घटती कीमतों ने त्योहार की रौनक  फीकी कर दी है.

पश्चिम बंगाल में बदला बाजार का माहौल

पश्चिम बंगाल में इस बार बकरीद से पहले बाजार का माहौल पूरी तरह बदला हुआ दिखाई दे रहा है. कई जगहों पर मुस्लिम खरीदार बड़े पशु खरीदने से दूरी बना रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती  और कानूनी परेशानियों के डर से लोग बड़े पशुओं की खरीद नहीं कर रहे हैं. बाजारों में कई खरीदार सीधे व्यापारियों से कह रहे हैं कि वे इस बार बड़े पशु नहीं खरीदेंगे. कुछ जगहों पर तो विक्रेताओं को पशु वापस ले जाने तक की नौबत आ गई है.

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन किसानों और व्यापारियों पर पड़ा है, जो पूरे साल बकरीद के सीजन में अच्छी कमाई की उम्मीद रखते थे. पश्चिम बंगाल में मवेशी व्यापार का बड़ा हिस्सा हिंदू किसान और व्यापारी संभालते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय मुख्य खरीदार माना जाता है. इस बार बाजार में खरीदारों की कमी से व्यापार लगभग ठप पड़ गया है.

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Published: 26 May, 2026 | 06:22 PM

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