PM Kisan 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त को लेकर देशभर के करोड़ों किसानों का इंतजार आज खत्म होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से इस किस्त को जारी करेंगे. इस बार यूपी के करीब 50 लाख किसानों को झटका लग सकता है, क्योंकि उनके खाते में राशि नहीं पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. योजना के तहत देश के 9.44 करोड़ किसानों के खातों में 18,880 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे.
किसानों के खाते में आएंगे 2000 रुपये, साल में 3 किस्त का नियम
पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल कुल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह राशि 2,000-2,000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. 23वीं किस्त वित्त वर्ष 2026-27 की पहली किस्त होगी. इससे पहले 22वीं किस्त 13 मार्च 2026 को जारी की गई थी. इस बार किसानों को पिछली बार की तुलना में कम इंतजार करना पड़ा है, जिससे उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी.
यूपी के 50 लाख किसानों को लग सकता है झटका
उत्तर प्रदेश में करीब 2.88 करोड़ किसानों ने पीएम किसान योजना के लिए पंजीकरण कराया है. पिछली किस्त में लगभग 2.18 करोड़ किसानों को लाभ मिला था. लेकिन इस बार मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 50 लाख से अधिक किसान इस किस्त से वंचित रह सकते हैं. इसका मुख्य कारण ये बताया जा रहा है कि कई किसानों ने अभी तक अपनी Farmer ID नहीं बनवाई है. सरकार ने साफ किया है कि बिना जरूरी दस्तावेज और अपडेट के लाभ की राशि रुक सकती है.
e-KYC और दस्तावेज अपडेट नहीं तो रुक सकती है किस्त
कृषि मंत्रालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों ने e-KYC पूरी नहीं की है, उनकी किस्त अटक सकती है. इसके अलावा आधार सीडिंग, बैंक खाता अपडेट और भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी जरूरी है. किसान pmkisan.gov.in पर जाकर Know Your Status और Beneficiary List के जरिए अपना नाम चेक कर सकते हैं. सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करें ताकि लाभ में कोई रुकावट न आए.
बिहार में नाम कटे, सरकार ने दिए सख्त संकेत
बिहार में भी पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या में बदलाव देखा गया है. पिछली किस्त में जहां 73 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला था, वहीं इस बार करीब 34 हजार किसानों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि यह कदम केवल उन्हीं किसानों के लिए है जो पात्रता शर्तें पूरी नहीं कर रहे हैं या जिनकी जानकारी अधूरी है. आने वाले समय में सरकार योजना में पारदर्शिता और सख्ती और बढ़ा सकती है.