Onion import ban: भारत और बांग्लादेश के बीच कृषि व्यापार हमेशा से एक अहम कड़ी रहा है. खासतौर पर प्याज के मामले में बांग्लादेश लंबे समय तक भारत पर निर्भर रहा है. लेकिन अब इस रिश्ते में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. बांग्लादेश सरकार ने भारत से प्याज के लिए नए आयात परमिट जारी करने पर रोक लगा दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारत में प्याज का उत्पादन अच्छा माना जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय प्याज की मांग बनी हुई है.
घरेलू किसानों को प्राथमिकता देने की कोशिश
बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम देश के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. बांग्लादेश में इस समय स्थानीय स्तर पर प्याज की फसल बाजार में आ रही है. सरकार नहीं चाहती कि सस्ते आयात के कारण घरेलू किसानों को नुकसान उठाना पड़े. इसी वजह से हिली लैंड पोर्ट समेत अन्य रास्तों से भारत से नए आयात परमिट फिलहाल रोक दिए गए हैं.
हालांकि, जिन आयातकों के पास पहले से मंजूर परमिट हैं, उनके जरिए प्याज की खेप 30 जनवरी तक आती रहेगी. यानी पूरी तरह से आयात बंद नहीं हुआ है, लेकिन नए ऑर्डर पर फिलहाल ब्रेक लगा दी गई है.
भारत-बांग्लादेश प्याज व्यापार का पुराना रिश्ता
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो बांग्लादेश भारतीय प्याज का सबसे बड़ा खरीदार रहा है. साल 2023-24 में भारत ने करीब 17.17 लाख टन प्याज का निर्यात किया था, जिसमें से लगभग 7.24 लाख टन प्याज अकेले बांग्लादेश भेजा गया. यानी भारत के कुल प्याज निर्यात का करीब 42 फीसदी हिस्सा बांग्लादेश जाता था.
लेकिन हाल के महीनों में यह तस्वीर काफी बदल गई है. अप्रैल से सितंबर 2025-26 के बीच भारत से बांग्लादेश को सिर्फ करीब 12,900 टन प्याज ही निर्यात हो पाया. यह गिरावट साफ तौर पर दिखाती है कि बांग्लादेश अब धीरे-धीरे अपनी निर्भरता कम करना चाहता है.
भारत की नीतियों से बांग्लादेश की नाराजगी
बांग्लादेश के इस फैसले की एक बड़ी वजह भारत की बार-बार बदलती निर्यात नीतियां भी मानी जा रही हैं. बीते कुछ वर्षों में भारत ने घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए कई बार प्याज के निर्यात पर रोक या कड़ी पाबंदियां लगाईं.
सितंबर 2019 में छह महीने और फिर सितंबर 2020 में करीब पांच महीने तक प्याज के निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगाई गई थी. इन फैसलों का असर उन देशों पर पड़ा, जो भारतीय प्याज पर निर्भर थे. बांग्लादेश में उस समय प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. हालात इतने बिगड़े कि साल 2020 में बांग्लादेश ने भारत को कूटनीतिक नोट भेजकर बार-बार निर्यात रोकने पर चिंता जताई थी.
भारतीय प्याज की वैश्विक मांग बनी हुई
हालांकि बांग्लादेश में आयात कम हुआ है, लेकिन भारतीय प्याज की अंतरराष्ट्रीय मांग अब भी मजबूत बताई जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, गुणवत्ता और स्वाद के कारण भारतीय प्याज को खाड़ी देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया और कुछ अफ्रीकी बाजारों में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है.
भारतीय निर्यातक भी मानते हैं कि अगर सरकार की ओर से भाड़ा सब्सिडी या अन्य प्रोत्साहन मिले, तो वे नए बाजारों में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं. इससे बांग्लादेश पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी बेहतर दाम मिल सकते हैं.
राजनीति और बाजार का मिला-जुला असर
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बांग्लादेश के इस कदम के पीछे मौजूदा राजनीतिक हालात की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ढाका में सत्ता व्यवस्था में आए बदलाव और भारत के साथ रिश्तों में नई प्राथमिकताओं का असर व्यापारिक फैसलों पर भी दिख रहा है.
क्या होगा असर?
बांग्लादेश का यह फैसला भारतीय प्याज किसानों के लिए अल्पकाल में चिंता बढ़ा सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां निर्यात पर निर्भरता ज्यादा है. लेकिन लंबे समय में यह भारत के लिए चेतावनी भी है कि कृषि निर्यात में स्थिर और भरोसेमंद नीति कितनी जरूरी है. अगर भारत अपने निर्यात नियमों में निरंतरता रखता है और नए बाजारों पर फोकस करता है, तो ऐसे फैसलों का असर सीमित किया जा सकता है.