Cotton prices India: देश में कपास की खेती करने वाले किसानों और कपास कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बीते कुछ दिनों में राहत और चिंता, दोनों तरह की खबरें सामने आई हैं. 31 दिसंबर के बाद कच्ची कपास के आयात पर दी गई शुल्क छूट खत्म होते ही घरेलू बाजार में कपास के दाम मजबूत हुए हैं. कई मंडियों में कीमतों में साफ तौर पर तेजी देखी जा रही है. हालांकि, इस बढ़त पर आगे चलकर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत से सूत (यार्न) का सबसे बड़ा खरीदार बांग्लादेश आयात पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है.
आयात छूट खत्म होने का सीधा असर बाजार पर
कपास आयात पर शुल्क छूट खत्म होते ही देश की प्रमुख कपास मंडियों में भाव सुधरने लगे. व्यापारियों के मुताबिक अलग-अलग इलाकों में कच्ची कपास के दाम 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं. कुछ बाजारों में कीमतें 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई हैं. हालांकि, यह अब भी MSP 8,100 रुपये प्रति क्विंटल से थोड़ा नीचे है. इसके बावजूद किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दाम और संभल सकते हैं.
किसानों को थोड़ी राहत, लेकिन पूरी खुशी नहीं
इस तेजी से किसानों को जरूर थोड़ी राहत मिली है, क्योंकि बीते कई हफ्तों से कपास के दाम दबाव में थे. लागत बढ़ने के बावजूद जब बाजार भाव नीचे रहते हैं, तो किसान को नुकसान उठाना पड़ता है. अब भाव में सुधार से किसानों की उम्मीदें जगी हैं, लेकिन MSP से नीचे कारोबार होना अब भी चिंता का विषय बना हुआ है.
बांग्लादेश का फैसला क्यों है अहम
भारतीय कपास और सूत बाजार के लिए बांग्लादेश बेहद अहम देश है. पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश भारत से सूत का सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है. भारत अपने कुल सूत उत्पादन का करीब 30 प्रतिशत निर्यात करता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 70 प्रतिशत रहती है. ऐसे में निर्यात में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर पूरे कपास चक्र पर पड़ता है.
अब खबर है कि बांग्लादेश ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन (BTTC) सूत आयात पर 10 से 20 प्रतिशत तक शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है. इसका मकसद अपने घरेलू सूत उत्पादकों को संरक्षण देना बताया जा रहा है. हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बाजार में इसकी चर्चा तेज हो गई है.
भारतीय सूत बाजार पर क्या पड़ेगा असर
CAI से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बांग्लादेश ने सूत पर आयात शुल्क लगाया, तो भारतीय सूत की कीमत वहां के बाजार में बढ़ जाएगी. इससे भारतीय सूत की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है और निर्यात घटने का खतरा रहेगा. निर्यात घटने का सीधा असर घरेलू सूत और कपास की मांग पर पड़ेगा, जिससे कीमतों पर फिर दबाव बन सकता है.
प्रेस्ड कॉटन और कैंडी रेट में भी सुधार
कच्ची कपास के साथ-साथ प्रेस्ड कॉटन की कीमतों में भी सुधार देखा गया है. कुछ बाजारों में प्रेस्ड कॉटन के दाम 1,000 से 1,500 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़े हैं. कारोबारियों का मानना है कि अगर सरकारी एजेंसियां समय पर दखल दें और कीमतों को लेकर स्पष्टता आए, तो बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है.
CCI की भूमिका बनी हुई है अहम
इस पूरे हालात में CCAI की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है. सीसीआई MSP पर कपास की सक्रिय खरीद कर रही है और अब तक लाखों गांठ कपास की खरीद हो चुकी है. इससे बाजार में कीमतों को सहारा मिला है. कई जानकारों का कहना है कि अगर सीसीआई समय रहते नई फसल के लिए कीमतों को लेकर संकेत देती है, तो मिलों और व्यापारियों की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है.
आगे बाजार किस दिशा में जाएगा?
कपास बाजार की आगे की दिशा अब दो बड़े कारकों पर निर्भर करेगी. पहला, घरेलू स्तर पर मांग और सरकारी खरीद की स्थिति, और दूसरा बांग्लादेश का आयात शुल्क को लेकर अंतिम फैसला. अगर बांग्लादेश शुल्क नहीं लगाता या सीमित दायरे में लगाता है, तो कपास और सूत बाजार को सहारा मिल सकता है. लेकिन अगर भारी शुल्क लगाया गया, तो मौजूदा तेजी ज्यादा समय तक टिक पाना मुश्किल होगा.
संतुलन की जरूरत
आयात शुल्क छूट खत्म होने से कपास के दामों को फिलहाल सहारा जरूर मिला है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फैसलों का असर आने वाले समय में दिख सकता है. किसानों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं तीनों के लिए यह समय सतर्क रहने का है, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और कपास उत्पादकों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके.