कम मेहनत में ज्यादा कमाई, पंगेसियस मछली के पालन से सालभर में बन जाएंगे लखपति

पंगेसियस मछली पालन कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला व्यवसाय है. इसे छोटे तालाब में शुरू किया जा सकता है. 5-6 महीने में मछली तैयार हो जाती है और साल में दो बार अच्छी कमाई होती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Aug, 2025 | 11:07 PM

आज के समय में कृषि के साथ-साथ किसान वैकल्पिक व्यवसायों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं. मछली पालन (Fish Farming) उनमें से एक है, जो कम जमीन, सीमित संसाधनों और थोड़े निवेश में भी अच्छा मुनाफा देता है. खासतौर पर पंगेसियस मछली का पालन इन दिनों बेहद लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसकी मांग बाजार में अधिक है और इसे साल में दो बार तैयार किया जा सकता है. यह व्यवसाय युवाओं में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसमें तकनीकी ज्ञान कम लगता है और मुनाफा अपेक्षाकृत अधिक मिलता है.

कम लागत में शुरू करें मछली पालन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मछली पालन की शुरुआत ज्यादा खर्चीली नहीं होती. एक सामान्य तालाब में पंगेसियस मछली के पालन के लिए करीब 2 लाख रुपये की लागत आती है. इसमें मछली के बच्चे, चारा, तालाब की साफ-सफाई और रख-रखाव शामिल होता है. पंगेसियस मछली की एक बड़ी खासियत ये है कि यह जल्दी तैयार हो जाती है और ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती. बाराबंकी जिले के रसूलपुर गांव के शैलेश नामक युवक ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले पंगेसियस मछली का पालन शुरू किया था और अब वह हर सीजन में 2 से 3 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने एक तालाब में 3 से 4 हजार मछली के बच्चे डाले और देखभाल के साथ उनका पालन किया.

पंगेसियस मछली की बढ़ती मांग

पंगेसियस मछली की मांग बाजार में अन्य मछलियों की तुलना में कहीं अधिक है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 5 से 6 महीने में पूरी तरह से तैयार हो जाती है. इसलिए किसान इसका पालन साल में दो बार कर सकते हैं. इसका बच्चा 1.5 से 2 रुपये में आसानी से बाहर से मंगवाया जा सकता है. इसके अलावा इसका स्वाद, बनावट और कीमत आम लोगों को खूब पसंद आती है, जिससे इसकी बिक्री जल्दी हो जाती है. होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू बाजारों में भी इसकी मांग बनी रहती है. इसी कारण छोटे किसान भी अब पंगेसियस पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

देखरेख जरूरी, पर मेहनत कम

हालांकि पंगेसियस मछली की देखरेख करनी पड़ती है, लेकिन यह अन्य मछलियों की तुलना में ज्यादा सहनशील होती है और जल्दी बीमार नहीं होती. इसका चारा थोड़ा महंगा जरूर होता है, लेकिन यह मछली कम समय में बड़ा आकार लेती है जिससे बिक्री पर अच्छा दाम मिलता है. तालाब की साफ-सफाई, ऑक्सीजन स्तर और पानी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होता है. शैलेश बताते हैं कि शुरू में थोड़ी दिक्कतें आती हैं, लेकिन एक बार समझ आने के बाद यह व्यवसाय आसान हो जाता है. अगर सही तरीके से पालन किया जाए तो हर छह महीने में अच्छी आमदनी हो सकती है.

युवाओं के लिए बेहतर स्वरोजगार का अवसर

पंगेसियस मछली पालन ने गांव के युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है. जहां एक ओर खेती में लागत ज्यादा और मुनाफा कम होता जा रहा है, वहीं मछली पालन से कम लागत में बेहतर कमाई संभव है. इसके लिए कोई बड़ी डिग्री या विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है, बल्कि स्थानीय कृषि या मत्स्य विभाग से थोड़ी सलाह लेकर शुरुआत की जा सकती है. सरकार की ओर से भी मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. यदि कोई युवा इस क्षेत्र में मेहनत और लगन से काम करे, तो यह व्यवसाय उन्हें आत्मनिर्भर बना सकता है.

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