Okra Farming Tips: भिंडी की खेती किसानों के लिए एक फायदेमंद विकल्प बन रही है. यह लगभग हर तरह की मिट्टी में आसानी से उगाई जा सकती है और साथ ही फसल भी जल्दी देती है. लेकिन बढ़िया उत्पादन के लिए सही देखभाल और कीट प्रबंधन बेहद जरूरी है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद के अनुसार, अगर कीट समय रहते नियंत्रित न किए जाएं, तो भिंडी की उपज और क्वालिटी दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है.
भिंडी की प्रमुख कीटें और उनका प्रभाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, भिंडी की फसल में कई कीटों का प्रकोप देखा जाता है, जो पौधों की पत्तियों, तनों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं.
- सफेद मक्खी: यह सबसे खतरनाक कीटों में से एक है. इसके शिशु और वयस्क पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं. यह पीत शिरा चितेरी रोग फैलाने का भी मुख्य कारण है.
- फुदका/तेला कीट: पत्तियों की निचली सतह पर रहते हुए रस चूसते हैं. इससे पत्तियां मुड़ने और पीली पड़ने लगती हैं. लगातार हमले से पौधे सूखने लगते हैं और उत्पादन गिर जाता है.
- फल छेदक कीट: यह तनों और फलों में छेद कर उन्हें अंदर से खराब कर देता है. ऐसे फल बाहर से सामान्य दिखते हैं, लेकिन अंदर से सड़े होते हैं और बाजार में बिक नहीं पाते.
बीज उपचार और संतुलित खेती
भिंडी की फसल में कीटों से बचाव के लिए बीज उपचार सबसे प्रभावी तरीका है. बुवाई से पहले बीजों को इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथोक्सम से उपचारित करना चाहिए. साथ ही खेत में संतुलित जैव विविधता बनाए रखें. मुख्य फसल के बीच-बीच में बेबीकॉर्न लगाना लाभकारी होता है क्योंकि यह परभक्षी कीटों को आकर्षित करता है. इसके अलावा, संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करना जरूरी है.
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भिंडी के पौधों की ग्रोथ के लिए नियमित निगरानी और सही जल प्रबंधन जरूरी है. पौधों की ताजगी और कलियों की संख्या बनाए रखने के लिए मिट्टी की नमी पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर ही पानी दें.
कीट नियंत्रण के लिए असरदार उपाय
डॉ. प्रमोद के अनुसार, कीट नियंत्रण के लिए सही दवाओं का संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग जरूरी है:
- सफेद मक्खी: डायफेंथियुरोन, फ्लोनिकैमिड, फ्लुपाइराडिफ्यूरोन
- फल छेदक कीट: इमामेक्टिन बेंजोएट
- फुदका कीट: बीजों का थियामेथोक्सम से उपचार
इन दवाओं का सही समय पर और संतुलित उपयोग फसल को स्वस्थ बनाए रखता है और उत्पादन बढ़ाता है.
बेहतर पैदावार के लिए टिप्स
- नियमित निगरानी और शुरुआती चरण में कीट नियंत्रण करें.
- संतुलित जैविक और रासायनिक खाद का प्रयोग करें.
- संक्रमित पौधों को समय पर हटाएं.
- खेत में पौधों की दूरी और रोपण सही रखें.