शिवराज का बड़ा बयान, कहा- दिल्ली-NCR के प्रदूषण के लिए केवल पराली को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना इसलिए शुरू की गई, क्योंकि पराली जलाना किसानों के लिए खेत खाली करने का आसान तरीका जरूर है, लेकिन इससे कई नुकसान होते हैं. इससे मिट्टी के लिए फायदेमंद कीड़े नष्ट हो जाते हैं, पोषक तत्व और जैविक कार्बन कम हो जाते हैं और जमीन की उर्वरता घटती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 14 Feb, 2026 | 01:18 PM

Stubble Management: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में कहा कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार सर्दियों में प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से अधिक नहीं है, जबकि उद्योग और वाहनों का योगदान ज्यादा है. उन्होंने यह भी कहा कि पराली जलाने से होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत मशीनों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 80 प्रतिशत तक सहायता दे रही है. पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 3.5 लाख से अधिक मशीनें बांटी गई हैं, जिससे पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है.

मंत्री ने कहा कि हरियाणा का मॉडल, जिसमें प्रति एकड़ प्रोत्साहन, फसल विविधीकरण,  डीएसआर तकनीक अपनाने और पराली न जलाने वाली पंचायतों को इनाम देने जैसी पहल शामिल हैं, एक बेहतर उदाहरण के रूप में सामने आया है. मंत्री ने कहा कि राज्य में पराली को अब बेकार नहीं जलाया जा रहा, बल्कि उससे पेलेट, थर्मल पावर, बायोमास, बायो-सीएनजी और ईंधन जैसे उपयोगी उत्पाद बनाए जा रहे हैं.

किसानों को बदनाम करना बंद होना चाहिए

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रदूषण के लिए किसानों को बदनाम करना बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में केंद्र का पर्यावरण मंत्रालय अक्सर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों को दिल्ली और उत्तर भारत के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है. लेकिन राज्यसभा में कृषि मंत्री ने साफ कहा है कि कुल प्रदूषण में पराली जलाने  की हिस्सेदारी सिर्फ लगभग 5 प्रतिशत है, इसलिए किसानों को दोष देना उचित नहीं है.

3 हजार कोल्ड स्टोरेज इकाइयां स्थापित की गई हैं

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना इसलिए शुरू की गई, क्योंकि पराली जलाना किसानों के लिए खेत खाली करने का आसान तरीका जरूर है, लेकिन इससे कई नुकसान होते हैं. इससे मिट्टी के लिए फायदेमंद कीड़े नष्ट हो जाते हैं, पोषक तत्व और जैविक कार्बन कम हो जाते हैं और जमीन की उर्वरता घटती है. उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष बनाया है. इसके तहत करीब 44 हजार कस्टम हायरिंग सेंटर, 25 हजार प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र, 17 हजार गोदाम और 3 हजार कोल्ड स्टोरेज इकाइयां स्थापित की गई हैं. इन कदमों से फलों और सब्जियों की कटाई के बाद होने वाला नुकसान 5 से 15 प्रतिशत तक कम हुआ है.

सरकार ने दालों में भी आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य तय किया है

मंत्री ने सदन को बताया कि देशभर में 152 किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रही है. उनके मुताबिक, भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया है और चावल व गेहूं में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है. सरकार ने दालों में भी आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य तय किया है.

उड़द की 100 प्रतिशत खरीद की गारंटी

एमएसपी के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि जब विपक्ष सत्ता में था, तब उसने स्वामीनाथन आयोग  की ‘लागत प्लस 50 प्रतिशत’ वाली सिफारिश को स्वीकार नहीं किया था. उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के 10 वर्षों में केवल 6 लाख मीट्रिक टन दालों की खरीद हुई, जबकि वर्तमान सरकार ने 1 करोड़ 92 लाख मीट्रिक टन दालें खरीदी हैं. साथ ही, तुअर, मसूर और उड़द की 100 प्रतिशत खरीद की गारंटी दी गई है, यानी किसान जितनी मात्रा बेचना चाहें, सरकार उसे खरीदेगी.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 14 Feb, 2026 | 01:16 PM

कच्चे आम का खट्टापन किस कारण होता है?