India-US Trade Deal: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर से हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर कहा है कि भारत-अमेरिका ड्रेट डील का मामला 18 फीसदी बनाम 0 फीसदी टैरिफ का है. उनके मुताबिक, सरकार कह रही है कि भारत के गारमेंट्स पर अमेरिका ने 18 फीसदी टैरिफ लगाया है, जबकि बांग्लादेश को 0 फीसदी टैरिफ का फायदा मिल रहा है. लेकिन इस रियायत की एक शर्त है- बांग्लादेश को अमेरिकी कपास आयात करनी होती है.
राहुल गांधी ने कहा कि जब इस मुद्दे पर संसद में सवाल उठाया गया कि भारत को बांग्लादेश की तरह टैरिफ का फायदा क्यों नहीं मिल रहा, तो मंत्री का जवाब था कि अगर भारत भी 0 फीसदी टैरिफ चाहता है, तो उसे अमेरिका से कपास खरीदनी होगी. सवाल यह है कि अगर यही शर्त थी, तो सरकार ने पहले से यह बात साफ क्यों नहीं की? क्या यह वास्तव में कोई व्यावहारिक विकल्प है? क्योंकि अगर हम अमेरिकी कपास आयात करते हैं, तो इसका सीधा असर देश के कपास किसानों पर पड़ेगा. उनकी मांग घट सकती है और उन्हें नुकसान हो सकता है.
18% टैरिफ बनाम 0% – आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं। और, किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।
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— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 14, 2026
18 फीसदी टैरिफ की वजह से नुकसान उठाना पड़ेगा
काग्रेस नेता ने कहा कि दूसरी तरफ, अगर ऐसा नहीं करते, तो हमारे टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को 18 फीसदी टैरिफ की वजह से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ेगा. यानी स्थिति ऐसी बन जाती है जिसमें एक तरफ किसानों का नुकसान और दूसरी तरफ निर्यातकों का घाटा. इसका मतलब ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ जैसी हालत. इसलिए जरूरी है कि सरकार साफ-साफ बताए कि इस व्यापार समझौते की पूरी शर्तें क्या हैं और देश के हित में उसका संतुलित समाधान क्या है. क्योंकि स्थिति बेहद उलझी हुई दिख रही है. अगर भारत अमेरिकी कपास आयात करता है, तो अपने ही कपास किसानों की मांग और आय पर असर पड़ सकता है और अगर अमेरिकी कपास नहीं मंगाई जाती, तो 18 फीसदी टैरिफ के कारण भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक बाजार में नुकसान झेलना पड़ सकता है.
बांग्लादेश भारत से कपास आयात कम करने या बंद करने का संकेत देता है
इस बीच, अगर बांग्लादेश भारत से कपास आयात कम करने या बंद करने का संकेत देता है, तो यह दबाव और बढ़ जाएगा. भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती लाखों-करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ी हुई है. इन पर किसी भी तरह की चोट का मतलब है बड़े पैमाने पर रोजगार और आय पर असर. ऐसी स्थिति में जरूरत एक संतुलित और दूरदर्शी नीति की है, जो किसानों और निर्यातकों दोनों के हितों की रक्षा करे. व्यापार समझौते इस तरह बनाए जाने चाहिए कि देश के प्रमुख क्षेत्रों को असमंजस में न डालें, बल्कि उनकी प्रतिस्पर्धा और स्थिरता दोनों को मजबूत करें.