India US trade deal: भारतीय किसानों और कृषि निर्यात से जुड़े लोगों के लिए अमेरिका से एक बेहद अच्छी खबर सामने आई है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब अमेरिका जाने वाले भारत के करीब 75 प्रतिशत कृषि उत्पादों पर कोई अतिरिक्त आयात शुल्क नहीं लगेगा. इसका सीधा मतलब यह है कि भारतीय चावल, मसाले, चाय, कॉफी, तिलहन और मत्स्य उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में पहले से सस्ते और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे. इससे न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आमदनी में भी इजाफा होने की उम्मीद है.
शून्य टैरिफ से भारतीय किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
SBI की रिपोर्ट बताती है कि भारत का अमेरिका के साथ कृषि व्यापार पहले से ही मजबूत स्थिति में है. दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार में भारत को करीब 1.3 अरब डॉलर का अधिशेष हासिल है. अब नए टैरिफ ढांचे के तहत भारत के लगभग 1.36 अरब डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य अतिरिक्त शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा. इससे भारतीय उत्पादों की लागत कम होगी और वे दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा आकर्षक बनेंगे. इसका असर यह होगा कि अमेरिकी खरीदार भारत से ज्यादा मात्रा में कृषि उत्पाद मंगाएंगे.
चावल बना भारत की सबसे बड़ी ताकत
अगर चावल की बात करें तो अमेरिका के कुल चावल आयात में भारत की हिस्सेदारी पहले से ही काफी मजबूत है. SBI रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका दुनिया से करीब 1.3 अरब डॉलर का चावल आयात करता है, जिसमें से लगभग 341 मिलियन डॉलर का चावल भारत से जाता है. यानी अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल की हिस्सेदारी करीब 24.7 प्रतिशत है. शून्य टैरिफ मिलने के बाद भारतीय चावल किसानों को और बड़ा बाजार मिल सकता है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी.
चाय, कॉफी और मसालों को मिलेगा नया सहारा
चाय, कॉफी और मसालों के क्षेत्र में भी यह बदलाव अहम साबित हो सकता है. अमेरिका इन उत्पादों का करीब 14 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि भारत की हिस्सेदारी फिलहाल लगभग 396 मिलियन डॉलर यानी 2.8 प्रतिशत है. SBI रिपोर्ट मानती है कि नया टैरिफ ढांचा बागान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा. इससे चाय बागान, कॉफी उत्पादक और मसाला किसानों के लिए अमेरिकी बाजार में नए मौके खुलेंगे.
मछली और जलीय उत्पादों के लिए भी राहत की खबर
मत्स्य क्षेत्र के लिए भी यह फैसला राहत लेकर आया है. अमेरिका दुनिया भर से करीब 18.84 अरब डॉलर के मछली और जलीय उत्पाद आयात करता है. इसमें भारत से करीब 1.8 अरब डॉलर के उत्पाद जाते हैं, यानी भारत की हिस्सेदारी लगभग 9.6 प्रतिशत है. पहले अमेरिकी टैरिफ के कारण यह सेक्टर दबाव में था, लेकिन अब 18 प्रतिशत का कम शुल्क लागू होने से निर्यात बढ़ने की उम्मीद है. इससे तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों और इससे जुड़े कारोबारियों को फायदा मिल सकता है.
फल, सब्जी और प्रोसेस्ड फूड में अभी बड़ी संभावनाएं
SBI की रिपोर्ट यह भी बताती है कि कुछ कृषि क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी अभी काफी कम है. उदाहरण के लिए, अमेरिका खाने योग्य फलों और मेवों का करीब 21 अरब डॉलर का आयात करता है, लेकिन भारत से सिर्फ 39 मिलियन डॉलर का सामान जाता है. इसी तरह खाने योग्य सब्जियों और जड़ों में अमेरिका का आयात 12 अरब डॉलर से ज्यादा है, जबकि भारत से सिर्फ 109 मिलियन डॉलर का निर्यात होता है. प्रोसेस्ड सब्जी और फलों में भी भारत की हिस्सेदारी सीमित है. नए टैरिफ नियम इन क्षेत्रों में भारत के लिए आगे बढ़ने का मौका दे सकते हैं.
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका इन सभी चयनित कृषि श्रेणियों में कुल मिलाकर करीब 81 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.8 अरब डॉलर यानी लगभग 3.5 प्रतिशत है. यह साफ दिखाता है कि भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में अभी बहुत बड़ा दायरा खुला हुआ है.
किसानों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव
SBI की रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कम या शून्य टैरिफ से भारतीय उत्पाद ज्यादा बिकाऊ बनेंगे, निर्यात बढ़ेगा और इसका सीधा फायदा किसानों तक पहुंचेगा. अगर इस मौके का सही इस्तेमाल किया गया, तो आने वाले समय में अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों के लिए सबसे बड़ा और भरोसेमंद बाजार बन सकता है. इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.