Agricultural Exports: इंडोनेशिया ने पिछले महीने भारत से मूंगफली (ग्राउंडनट) के आयात पर लगी रोक हटा ली है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय निर्यातक वहां माल भेजने से हिचक रहे हैं. निर्यातकों का कहना है कि नई शर्तें बहुत सख्त हैं और कारोबार काफी जोखिम भरा हो गया है. पश्चिम भारत के एक निर्यातक के अनुसार, इंडोनेशिया ने आयात की अनुमति तो दी है, लेकिन निर्यातकों की सूची घटाकर करीब 75 कर दी गई है और नियम बेहद कड़े हैं.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, नई शर्तों के तहत मूंगफली में अफ्लाटॉक्सिन की मात्रा 15 पार्ट्स पर बिलियन (PPB) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जिसे पूरा करना भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किल माना जा रहा है. व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीमा जानबूझकर इतनी कम रखी गई है, ताकि भारत के लिए इसे पूरा करना कठिन हो. गौरतलब है कि इंडोनेशिया ने 2 सितंबर 2025 से गुणवत्ता मानकों, खासकर ज्यादा अफ्लाटॉक्सिन पाए जाने के कारण भारतीय मूंगफली के आयात पर रोक लगा दी थी.
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तीन महीने बाद अफ्लाटॉक्सिन की शिकायत की
निर्यातकों ने इंडोनेशियाई अधिकारियों के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इंडोनेशियन क्वारंटाइन अथॉरिटी ने भारत से भेजी गई खेप के पहुंचने के करीब तीन महीने बाद अफ्लाटॉक्सिन की शिकायत की. इस दौरान मूंगफली को किस तरह और किन परिस्थितियों में गोदामों में रखा गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे पूरा मामला और भी संदेहास्पद हो जाता है. भारतीय निर्यातकों का कहना है कि इंडोनेशिया के परीक्षण मानक विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं.
1 किलो मूंगफली के सैंपल की जांच
उदाहरण के तौर पर, इंडोनेशियन क्वारंटाइन अथॉरिटी (IQA) एक खेप से केवल 1 किलो मूंगफली का सैंपल लेकर जांच करती है, जबकि भारत में APEDA 20 किलो का सैंपल लेकर परीक्षण करता है. इसी विवाद को सुलझाने के लिए अक्टूबर के अंत में इंडोनेशिया की एक टीम भारत आई थी. टीम ने किसानों और निर्यातकों की प्रक्रियाओं को समझने के लिए कई सुविधाओं का दौरा किया.
इंडोनेशिया ने जियो-टैगिंग जैसे नए नियम लागू किए
निर्यातकों के मुताबिक, इस दौरे के बाद इंडोनेशिया ने जियो-टैगिंग जैसे नए नियम लागू किए और अफ्लाटॉक्सिन को लेकर मानकों को और सख्त कर दिया. नए नियमों के तहत यदि किसी खेप में अफ्लाटॉक्सिन पाया गया तो संबंधित निर्यातक को निलंबित किया जा सकता है. इसके अलावा, स्वीकृत निर्यातकों की संख्या घटा देना भी एक बड़ा फैसला रहा, जिससे कई शिपर्स की रुचि खत्म हो गई है. इन हालातों के चलते प्रतिबंध हटने के बाद भी अब तक सिर्फ 800 टन मूंगफली ही इंडोनेशिया भेजी जा सकी है.
मूंगफली का उत्पादन रिकॉर्ड 11.09 मिलियन टन रहने की उम्मीद
इस बीच, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार खरीफ सीजन में मूंगफली का उत्पादन रिकॉर्ड 11.09 मिलियन टन रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल 10.41 मिलियन टन था. 2024-25 फसल वर्ष में कुल मूंगफली उत्पादन 11.94 मिलियन टन रहा. इसके बावजूद इंडोनेशिया द्वारा आयात रोके जाने के बाद भी मूंगफली के दाम बढ़े हुए हैं और फिलहाल यह 68,000 रुपये प्रति टन पर बिक रही है, जो एक साल पहले 51,444 रुपये प्रति टन थी. हालांकि कीमतें अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य 72,630 रुपये प्रति टन से नीचे हैं.
कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की तेजी
निर्यातकों के अनुसार मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने के कारण हाल के दिनों में कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की तेजी आई है. इंडोनेशिया भारत की कुल मूंगफली निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आयात करता है. पिछले वित्त वर्ष में भारत ने कुल 7.46 लाख टन मूंगफली का निर्यात किया था, जिसमें से 2.77 लाख टन, करीब 280 मिलियन डॉलर मूल्य की मूंगफली, इंडोनेशिया को भेजी गई थी.