Haryana News: हरियाणा के करनाल जिले में 2025-26 के धान खरीद सीजन के खत्म होने के करीब चार महीने बाद भी जिले की अनाज मंडियों से धान उठाने वाले ट्रांसपोर्टरों को उनका भुगतान नहीं मिला है. इससे ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वजह यह है कि खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनके बिलों का सत्यापन और मंजूरी अटकी हुई है. इस सीजन में कथित गड़बड़ियों के मामले में छह एफआईआर दर्ज होने के बाद कुछ इंस्पेक्टर गिरफ्तार हैं या ड्यूटी पर नहीं हैं, जिससे परिवहन राउंड की जांच प्रक्रिया रुक गई है. ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इंस्पेक्टर की अनिवार्य जांच और क्लियरेंस के बिना उनके भुगतान जारी नहीं हो सकते. इसी समस्या को लेकर ट्रांसपोर्टरों और मजदूर ठेकेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक से मिलकर जल्द समाधान की मांग की है.
ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि खरीफ 2025-26 सीजन के दौरान मंडी लेबर कॉन्ट्रैक्टर/मंडी ट्रांसपोर्टर कॉन्ट्रैक्टर (MLC/MTC) सिस्टम के तहत धान की उठान और ढुलाई का काम जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC), मंडी समितियों और अन्य खरीद एजेंसियों के निर्देशों के अनुसार किया गया था. उनके मुताबिक, पूरा काम सही तरीके से और संतोषजनक ढंग से पूरा किया गया.
भुगतान के दावे प्रोसेस नहीं हो पा रहे हैं
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ट्रांसपोर्टर ने कहा कि लगभग चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण उनके भुगतान के दावे प्रोसेस नहीं हो पा रहे हैं. धान खरीद में गड़बड़ियों को लेकर दर्ज एफआईआर के चलते कुछ इंस्पेक्टर गिरफ्तार हैं या फरार चल रहे हैं, जिससे भुगतान अटका हुआ है. उन्होंने कहा कि जब यह मुद्दा डीएफएससी के सामने उठाया गया, तो अधिकारियों ने कहा कि भुगतान तभी जारी होगा जब जीपीएस ट्रैकर और ई-खरीद हरियाणा पोर्टल के जरिए सत्यापन पूरा हो जाएगा, जैसा कि निदेशालय के निर्देश हैं. लेकिन ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि जीपीएस सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ियां आ रही हैं, जिससे गाड़ियों के चक्कर (ट्रिप) का सही सत्यापन नहीं हो पा रहा.
जीपीएस डेटा उपलब्ध नहीं है
उनका कहना है कि कई मामलों में जीपीएस डिवाइस पहले से लगी और सक्रिय होने के बावजूद सिस्टम ‘इस ट्रिप के लिए जीपीएस डेटा उपलब्ध नहीं है’ दिखा रहा है. साथ ही दूरी के आंकड़ों में भी गड़बड़ी है. कुछ वाहनों में शून्य किलोमीटर दर्ज हो रहे हैं, तो कहीं 50 से 100 किलोमीटर दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक दूरी अलग है ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि दूरी की गणना मंडियों और चावल मिलों के लैटिट्यूड और लॉन्गिट्यूड कोऑर्डिनेट्स से की जा रही है, जिससे आंकड़े सही नहीं आ रहे हैं.
जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए
उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन टूल्स जैसे गूगल मैप्स सबसे छोटा रास्ता दिखाते हैं, जो भारी ट्रकों के लिए उपयुक्त नहीं होता, इसलिए दूरी में और गलतिया हो रही हैं.प्रतिनिधिमंडल ने विभाग से मांग की कि जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए और मंडी इंस्पेक्टर द्वारा जारी गेट पास को परिवहन का वैध प्रमाण माना जाए. साथ ही, उन्होंने जिला स्तर पर DFSC के तहत एक समिति बनाने की भी मांग की, जो वास्तविक दूरी की जांच करे और विवाद सुलझाए. ट्रांसपोर्टरों ने इंस्पेक्टरों की तुरंत नियुक्ति और लंबित बिलों की जल्द मंजूरी की अपील की, ताकि जिले में धान की ढुलाई सुचारू रूप से हो सके.