करनाल धान खरीदी घोटाले में कार्रवाई से हड़कंप, गिरफ्तारी के डर से अग्रिम जमानत की अर्जी दे रहे आरोपी

करनाल जिले में धान खरीद घोटाले की जांच तेज हो गई है. कई आढ़ती और मिलर अग्रिम जमानत के लिए अदालत पहुंचे. पुलिस ने छह एफआईआर दर्ज की हैं और 26 लोगों को गिरफ्तार किया. पूर्व वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.

Kisan India
नोएडा | Published: 26 Feb, 2026 | 07:22 PM

Haryana News: हरियाणा के करनाल जिले की कई अनाज मंडियों के कई आढ़ती और राइस मिलर कथित धान खरीद घोटाले में संभावित गिरफ्तारी के डर से अलग-अलग अदालतों में अग्रिम जमानत की अर्जी दे रहे हैं. यह कदम तब उठाया गया है जब 2025- 26 के धान खरीद सीजन में अनियमितताओं की जांच कर रही दो एसआईटी ने जांच तेज कर दी है. पुलिस ने पांच एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दी हैं, जिनकी जांच एएसपी कांची सिंघल की अगुवाई वाली एसआईटी कर रही है. छठी एफआईआर, जो सिटी थाना में दर्ज है, पहले से ही इसी अधिनियम के तहत दर्ज है और उसकी जांच डीएसपी राजीव कुमार की एसआईटी कर रही है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, चार-पांच आढ़ती और मिलर अग्रिम जमानत के लिए अदालत पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ गिरफ्तार आरोपी नियमित जमानत के लिए भी आवेदन कर चुके हैं. सोमवार को जिले की कई अदालतों में आठ-नौ लोगों की जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी है. कहा जा रहा है कि जिला पुलिस अदालत में जाकर आरोपियों की जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज करने की मांग भी करेगी.

अब तक छह एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं

धान खरीद सीजन में कथित गड़बड़ियों के मामले में अब तक छह एफआईआर  दर्ज हो चुकी हैं. जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के कर्मचारी और अधिकारी, खरीद एजेंसियां, आढ़ती, राइस मिलर, किसान, ट्रांसपोर्टर और अन्य लोग शामिल थे. इस मिलीभगत के कारण कथित तौर पर ‘फर्जी खरीद’ (घोस्ट प्रोक्योरमेंट) हुई.

एक सचिव को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है

पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर अब तक 26 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है या वे जांच में शामिल हो चुके हैं. गिरफ्तार लोगों में अलग-अलग मार्केट कमेटियों के चार सचिव, एक पूर्व जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC), खरीद एजेंसियों और एचएसएएमबी से जुड़े कर्मचारी, आढ़ती, राइस मिलर और कुछ निजी व्यक्ति शामिल हैं. इनमें से एक सचिव को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है.

दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई

करनाल के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी  तरीके से की जा रही है और अब तक दर्ज मामलों में पर्याप्त सबूत जुटाए जा चुके हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस अदालत में अग्रिम जमानत और नियमित जमानत दोनों का मजबूती से विरोध करेगी. उनका कहना है कि इस मामले में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी उनकी प्राथमिकता है.

सीबीआई जांच की मांग की गई

वहीं, आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कथित ‘फर्जी धान खरीद घोटाले’ की सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने इस संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखा है. उनका आरोप है कि फर्जी गेट पास, जे-फॉर्म, अवैध कच्ची पर्ची और किसानों के बैंक खातों के दुरुपयोग के जरिए एमएसपी की चोरी और केंद्र सरकार के धन का गबन किया गया है. उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में हुई खरीद की सीबीआई जांच होनी चाहिए, ताकि सरकारी खजाने को हुए नुकसान का सही आकलन हो सके.

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Published: 26 Feb, 2026 | 07:22 PM

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