करनाल धान घोटाले में बड़ी कार्रवाई, दो कमेटी सचिव सहित कुल 4 लोग गिरफ्तार..जांच जारी

एसआईटी टीन ASP कान्ची सिंघल के निर्देशन में काम कर रही है. टीम ने अब तक जिले में दर्ज छह एफआईआर में से पांच की जांच की है. पुलिस के अनुसार, आरोपित अधिकारियों ने कुछ मिलरों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी गेट पास जारी किए, जिससे धान मंडियों में वास्तव में नहीं पहुंची धान की खरीद को दिखाया जा सके.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 18 Feb, 2026 | 01:01 PM

Paddy Procurement: हरियाणा के करनाल जिले में धान खरीद घोटाले से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. कहा जा रहा है कि 2025-26 के कथित धान खरीद घोटाले में एक बड़ी कार्रवाई हुई है. विशेष जांच दल (SIT) ने चार और अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. इसमें करनाल के पूर्व जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के दो वर्तमान सचिव और एक निलंबित मार्केट कमेटी सचिव शामिल हैं. गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान करनाल के पूर्व जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार, करनाल मार्केट कमेटी की पूर्व सचिव आशा रानी, जूंढला मार्केट कमेटी के सचिव दीपक सुहाग और असंध मार्केट कमेटी के सचिव कृष्ण ढांकर के रूप में की गई है. हालांकि, अनिल कुमार पहले गुरुग्राम में दर्ज अलग मामले में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किए गए थे और उन्हें पेशी वॉरंट पर करनाल लाया गया. उन पर तरौर अनाज मंडी से जुड़ी एक घटना में कमीशन लेने का आरोप है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आशा रानी, जो पहले से ही सिटी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में मुख्य आरोपी थीं और निलंबित थीं, उस मामले में जमानत पर बाहर थीं. उन्हें अब करनाल के सदर पुलिस स्टेशन में 30 अक्टूबर को दर्ज एक अन्य एफआईआर में गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कथित रूप से फर्जी गेट पास जारी करने का आरोप है. इसी मामले में दीपक सुहाग को भी गिरफ्तार किया गया, जबकि कृष्ण ढांकर को 11 नवंबर को असंध पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के तहत हिरासत में लिया गया.

अधिकारियों ने  मिलरों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी गेट पास जारी किए

एसआईटी टीन ASP कान्ची सिंघल के निर्देशन में काम कर रही है. टीम ने अब तक जिले में दर्ज छह एफआईआर में से पांच की जांच की है. पुलिस के अनुसार, आरोपित अधिकारियों ने कुछ मिलरों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी गेट पास जारी किए, जिससे धान मंडियों  में वास्तव में नहीं पहुंची धान की खरीद को दिखाया जा सके. ये फर्जी रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किए गए. एसपी नरेंद्र बिजारनिया ने कहा कि सभी शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. एसपी नरेंद्र बिजारनिया ने कहा कि यह सिर्फ अनियमितताओं का मामला नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ धोखा है. रैंक या प्रभाव कुछ भी हो, किसी को नहीं बख्शा जाएगा और कानून अपना रास्ता तय करेगा.

पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है

उन्होंने आगे कहा कि  हम सबूतों का पीछा कर रहे हैं, चाहे वह कहीं भी ले जाए. करनाल पुलिस इस सुनियोजित घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है. पहले, 7 फरवरी को एसआईटी ने पांच संबंधित एफआईआर में पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया था. इनमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के दो इंस्पेक्टर, हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन संघ के दो मैनेजर और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन का एक तकनीकी सहायक शामिल थे. उन पर भी फर्जी गेट पास जारी करने का आरोप है.

छठा मामला सिटी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया

इन पांच एफआईआर के अलावा, छठा मामला सिटी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया, जब सरकारी रिकॉर्ड में दिखाए गए बड़े पैमाने पर धान की खरीद असल में मौजूद नहीं थी, जिससे खरीद डेटा में व्यवस्थित हेरफेर का संकेत मिला. छठी एफआईआर में अब तक 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के कर्मचारी, एक आढ़ती और एक मिलर-सहित आढ़ती शामिल हैं. इस बीच भारीतय किसान यूनियनन ने गिरफ्तारियों की सराहना की और मामले की गहराई से जांच की मांग की. यूनियन के प्रवक्ता भदुर सिंह मेहला ने कहा कि यह एक अच्छा कदम है कि पुलिस ने चार अधिकारियों को गिरफ्तार किया. इस मामले की पूरी तरह से जांच होनी चाहिए, ताकि इस घोटाले में शामिल सभी लोग सामने आ सकें.

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Published: 18 Feb, 2026 | 12:58 PM
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