CBDC pilot project: भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. अब राशन वितरण की प्रक्रिया में डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किया जाएगा. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह गुजरात में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के जरिए राशन वितरण की पायलट परियोजना की शुरुआत करेंगे. यह पहल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के लाभार्थियों के लिए शुरू की जा रही है.
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी और अनाज का लाभ सीधे सही व्यक्ति तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की हेराफेरी या गड़बड़ी की संभावना खत्म हो जाए.
गुजरात के चार जिलों से होगी शुरुआत
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत गुजरात के चार जिलों अहमदाबाद, आनंद, साबरमती और वलसाड से की जाएगी. शुरुआती चरण में सीमित संख्या में लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जाएगा. इसके लिए लाभार्थियों का ई-केवाईसी अनिवार्य होगा.
योजना के तहत पात्र लोगों के मोबाइल फोन में मौजूद RBI-सक्षम डिजिटल वॉलेट में हर महीने की पहली तारीख को डिजिटल फूड कूपन भेजे जाएंगे. राशन लेने के लिए लाभार्थियों को केवल फेयर प्राइस शॉप (FPS) पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा. स्कैन करने के बाद वे अपने डिजिटल कूपन को रिडीम कर सकेंगे और निर्धारित मात्रा में अनाज व अन्य खाद्य सामग्री प्राप्त कर सकेंगे.
सब्सिडी सीधे लाभार्थी तक, रोकथाम होगी गड़बड़ी की
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस प्रणाली का मुख्य मकसद यह है कि सब्सिडी सीधे लाभार्थी तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की डायवर्जन या अनियमितता न हो. अभी तक कई जगहों पर यह शिकायतें आती रही हैं कि अनाज का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता.
गुजरात सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मोना खंधार ने बताया कि सीमित स्तर पर किए गए प्रारंभिक परीक्षण में लाभार्थियों और राशन दुकानदारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. यदि यह पायलट सफल रहता है तो राज्य के बाकी 75 लाख राशन कार्ड धारकों को भी इस CBDC आधारित भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा.
बायोमेट्रिक झंझट से मिलेगी राहत
इस नई व्यवस्था से राशन कार्ड धारकों को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी अंगूठा लगाने की परेशानी से भी राहत मिलेगी. कई बार मशीन खराब होने या फिंगरप्रिंट मैच न होने की वजह से लाभार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. डिजिटल कूपन प्रणाली से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है.
इसके अलावा सरकार यह भी ट्रैक कर सकेगी कि जारी किए गए कूपन का इस्तेमाल सिर्फ निर्धारित खाद्य सामग्री के लिए ही हो रहा है या नहीं. यानी यह पूरी तरह लक्षित सब्सिडी प्रणाली होगी.
PMGKAY के करोड़ों लाभार्थियों को फायदा
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत देशभर में करीब 81 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल मुफ्त दिया जाता है. यह वितरण लगभग पांच लाख उचित मूल्य की दुकानों के जरिए किया जाता है, जहां ई-पॉइंट ऑफ सेल (e-PoS) मशीनें लगी हुई हैं.
इससे पहले वर्ष 2015 में चंडीगढ़ और पुडुचेरी में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मॉडल लागू किया गया था, जिसमें राशन की जगह नकद सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजी जाती थी. लेकिन अब डिजिटल करेंसी के जरिए एक नया मॉडल अपनाया जा रहा है, जिसमें सब्सिडी नकद न होकर डिजिटल फूड कूपन के रूप में दी जाएगी.
भविष्य में अन्य राज्यों में भी विस्तार
केंद्र सरकार की योजना है कि गुजरात में सफल परीक्षण के बाद इसी तरह के पायलट प्रोजेक्ट दादरा एवं नगर हवेली, चंडीगढ़ और पुडुचेरी के शहरी क्षेत्रों में भी शुरू किए जाएं. अगर यह मॉडल कारगर साबित होता है तो आने वाले समय में पूरे देश में राशन वितरण प्रणाली में बड़ा डिजिटल बदलाव देखने को मिल सकता है.