Groundnut import ban: इंडोनेशिया में इन दिनों भारत से पहुंच रहे खाद्य सामान को लेकर बड़ा एक्शन देखने को मिला है. सरकार ने अवैध तरीके से आयात किए जा रहे मूंगफली समेत कई जरूरी खाद्य उत्पादों पर कड़ी कार्रवाई की है. यह कदम तब उठाया गया, जब यह सामने आया कि भारत से आने वाली मूंगफली और अन्य वस्तुएं नियमों को नजरअंदाज कर चोरी-छिपे देश में दाखिल हो रही थीं. इस कार्रवाई से न सिर्फ तस्करों में हड़कंप मचा है, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है.
कैसे सामने आया पूरा मामला
पिछले कुछ समय से इंडोनेशिया के बाजारों में मूंगफली, चावल, चीनी, प्याज, लहसुन और सूखी मिर्च की अचानक बढ़ी आपूर्ति देखी जा रही थी. जांच में पता चला कि इन वस्तुओं का बड़ा हिस्सा भारत से आ रहा था, लेकिन आधिकारिक रास्ते से नहीं. पहले ये खेपें मलेशिया के बंदरगाहों पर पहुंचाई जाती थीं और वहां से छोटी नावों और जहाजों के जरिए इंडोनेशिया भेज दी जाती थीं. मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद सरकार हरकत में आई और तटीय इलाकों में सख्त निगरानी शुरू कर दी गई.
कस्टम्स पोर्ट पर पकड़े गए कई जहाज
इंडोनेशियाई स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कम से कम 10 जहाजों को तंजुंग बलाई करीमुन कस्टम्स पोर्ट पर रोका गया है. इन जहाजों में सिर्फ मूंगफली ही नहीं, बल्कि चावल, चीनी, प्याज, लहसुन, सूखी मिर्च और शलोट्स जैसी जरूरी खाद्य वस्तुएं भी लदी थीं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 14.5 लाख टन चावल, एक लाख टन चीनी, 67 हजार टन शलोट्स, 44 हजार टन लहसुन, 7,800 टन प्याज, 5,000 टन से ज्यादा सूखी मिर्च और लगभग 1,700 टन मूंगफली जब्त की जा चुकी है. यह मात्रा अपने आप में बताती है कि अवैध व्यापार कितने बड़े स्तर पर चल रहा था.
खुद मौके पर पहुंचे कृषि मंत्री
इंडोनेशिया के कृषि मंत्री एंडी अमरान सुलैमान ने खुद कस्टम्स वेयरहाउस का दौरा कर जब्त की गई सामग्री का निरीक्षण किया. उन्होंने साफ कहा कि खाद्य सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अवैध व्यापार के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने रियाउ द्वीप समूह में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जाए.
अफ्लाटॉक्सिन बना सबसे बड़ी वजह
इस विवाद की जड़ में एक शब्द बार-बार सामने आ रहा है अफ्लाटॉक्सिन. यह एक जहरीला तत्व होता है, जो खराब तरीके से सुखाई गई या नमी में रखी गई मूंगफली में पाया जाता है. पिछले साल सितंबर में इंडोनेशिया ने भारत से मूंगफली के आयात पर रोक लगा दी थी, क्योंकि कई खेपों में अफ्लाटॉक्सिन की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई थी. बाद में नवंबर में कुछ शर्तों के साथ आयात की अनुमति दी गई, लेकिन अफ्लाटॉक्सिन की सीमा 15 पार्ट्स पर बिलियन (PPB) तय की गई, जिसे भारतीय निर्यातक बेहद सख्त और जोखिम भरा मानते हैं.
मलेशिया बना ट्रांजिट रास्ता
आधिकारिक नियमों से बचने के लिए व्यापारियों ने नया रास्ता चुना. मूंगफली भारत से मलेशिया के पोर्ट क्लांग पहुंचाई गई और वहां से छोटे जहाजों के जरिए इंडोनेशिया के डुमाई जैसे बंदरगाहों पर भेजी गई. आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं. सितंबर 2025 तक मलेशिया को भारत से मूंगफली का निर्यात 6,500 टन से ज्यादा नहीं था, लेकिन अक्टूबर में यह बढ़कर 8,300 टन, नवंबर में 15,800 टन और दिसंबर में 15,000 टन तक पहुंच गया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधा संकेत है कि मलेशिया केवल ट्रांजिट पॉइंट के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था.
कीमतों पर भी पड़ा असर
इस अवैध आयात का असर इंडोनेशिया के घरेलू बाजार पर भी दिखा. यहां मूंगफली की कीमतें गिरकर 35,000 इंडोनेशियाई रुपिया प्रति किलो से घटकर 30,000–32,000 इंडोनेशियाई रुपिया प्रति किलो रह गईं. (₹1 = 186.33 इंडोनेशियाई रुपिया). इसमें तस्करों और नाव संचालकों का कमीशन भी शामिल है, जो करीब 5,000 रुपिया प्रति किलो बताया जा रहा है.
भारत-इंडोनेशिया व्यापार पर बड़ा असर
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 7.46 लाख टन मूंगफली का निर्यात किया था, जिसकी कीमत करीब 795 मिलियन डॉलर रही. इसमें से अकेले इंडोनेशिया ने 2.77 लाख टन मूंगफली खरीदी, जिसकी वैल्यू लगभग 280 मिलियन डॉलर थी.
अब इस सख्ती के बाद साफ है कि दोनों देशों के बीच मूंगफली व्यापार को नए सिरे से नियमों और गुणवत्ता मानकों के तहत चलाना होगा. इंडोनेशिया का यह कदम सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के खाद्य व्यापार की दिशा तय करने वाला फैसला माना जा रहा है.