Milk Production: गांवों में अक्सर कहा जाता है कि जैसा खाना, वैसा स्वास्थ्य. यही बात पशुओं पर भी लागू होती है. अगर पशुओं को साफ और अच्छा चारा मिलेगा तो वे स्वस्थ रहेंगे और ज्यादा दूध भी देंगे. पशुपालन और डेयरी विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को साफ और बिना मिलावट वाला चारा ही खिलाएं. विभाग का कहना है कि स्मार्ट फीड, हेल्दी हर्ड यानी सही चारा ही स्वस्थ पशुओं की कुंजी है.
साफ चारा क्यों है जरूरी
पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार गंदा या फफूंदी लगा चारा पशुओं के लिए खतरनाक हो सकता है. इससे पशुओं में कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं. अगर चारा मिट्टी, केमिकल या गंदे पानी के संपर्क में आ जाए तो उसका असर सीधे पशु के स्वास्थ्य पर पड़ता है. साफ और सूखा चारा खिलाने से पशु की पाचन क्रिया ठीक रहती है. इससे दूध देने वाले पशुओं की सेहत बेहतर होती है और उनका उत्पादन भी बढ़ता है. विभाग का कहना है कि चारे की गुणवत्ता पर ध्यान देना हर पशुपालक की जिम्मेदारी है.
बीमारी का खतरा हो सकता है कम
विशेषज्ञों का मानना है कि साफ और बिना मिलावट वाला चारा देने से कई बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. खासकर बारिश के मौसम में चारे में नमी ज्यादा हो जाती है, जिससे उसमें फफूंदी लग सकती है. ऐसा चारा पशुओं के लिए नुकसानदायक होता है. अगर पशु बार-बार बीमार पड़ेंगे तो इलाज में खर्च बढ़ेगा और दूध उत्पादन घटेगा. इसलिए बेहतर है कि पहले से सावधानी रखी जाए. विभाग का साफ कहना है कि बीमारी से बचाव इलाज से ज्यादा आसान और सस्ता होता है.

स्मार्ट फीड से बढ़ेगा उत्पादन और किसानों की आय.
चारा रखने और देने का सही तरीका
पशुपालन विभाग के अनुसार चारे को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए. जहां पानी जमा न हो और नमी कम हो. अगर चारा गीला हो जाए तो उसे सुखाकर ही पशुओं को दें. चारा खिलाने से पहले उसे ध्यान से देखें. अगर उसमें बदबू आ रही हो या रंग बदल गया हो तो उसे इस्तेमाल न करें. पशुओं को रोज तय समय पर संतुलित मात्रा में चारा देना भी जरूरी है. इसके साथ ही पशुओं के बाड़े की सफाई का भी ध्यान रखें. साफ बाड़ा और साफ चारा मिलकर ही स्वस्थ झुंड तैयार करते हैं.
ज्यादा दूध और बेहतर उत्पादन
विभाग का कहना है कि जब पशु स्वस्थ रहेंगे तो उनका दूध उत्पादन भी बेहतर होगा. साफ चारा देने से पशुओं की ताकत बढ़ती है और वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं. दूध की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिल सकता है. इसका सीधा फायदा पशुपालकों की आमदनी पर पड़ता है. अगर पशुपालक थोड़ी सी सावधानी रखें और चारे की गुणवत्ता पर ध्यान दें तो वे कम खर्च में ज्यादा फायदा पा सकते हैं.
स्मार्ट फीड, हेल्दी हर्ड का संदेश
स्मार्ट फीड, हेल्दी हर्ड सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि पशुपालन का आसान मंत्र है. विभाग ने कहा है कि साफ, सुरक्षित और संतुलित चारा ही स्वस्थ पशुओं की नींव है. एनडीडीबी के अनुसार साफ और बिना मिलावट वाला चारा पशुओं के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और बीमारी का खतरा कम करता है. सरकार चाहती है कि हर पशुपालक इस संदेश को समझे और अपने स्तर पर जरूरी बदलाव करे. अगर पूरे गांव में साफ चारे की आदत अपनाई जाए तो पशुओं की सेहत बेहतर होगी और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा. अंत में विभाग ने अपील की है कि पशुपालक अपने पशुओं को परिवार का हिस्सा समझें और उनके खाने-पीने का पूरा ध्यान रखें. क्योंकि स्वस्थ पशु ही खुशहाल किसान की पहचान होते हैं.