कोकून खेती पर प्रतिबंध से 650 आदिवासी परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में, इस वजह से लगी रोक

तसर कोकून की खेती आसान नहीं होती. इसके लिए आदिवासियों को जंगल में कई दिनों तक रहना पड़ता है. इस दौरान उन्हें जंगली जानवरों का खतरा भी झेलना पड़ता है. वे टर्मिनेलिया अर्जुना (तेल्ला मड्डी) और येरू मड्डी जैसे पेड़ों की पत्तियों पर कीड़ों को पालते हैं. बाद में इन्हीं कोकून से रेशम तैयार होता है, जिससे साड़ियां और अन्य कपड़े बनाए जाते हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 26 Apr, 2026 | 09:12 AM

Tasar silkworm cultivation: तेलंगाना के मंचेरियल जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सैकड़ों आदिवासी परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. पीढ़ियों से जंगलों में तसर रेशम के कोकून उगाकर अपना जीवन चलाने वाले इन परिवारों को अब अचानक इस काम से रोक दिया गया है. वन विभाग ने प्राणहिता वन्यजीव अभयारण्य के भीतर तसर कोकून की खेती पर रोक लगा दी है, जिससे करीब 650 आदिवासी परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है.

परंपरा से जुड़ा है जीवन का आधार

तेलंगाना टुडे की खबर के अनुसार, मंचेरियल के वेमनापल्ली, कोटापल्ली, चेनूर, कन्नेपल्ली और नेन्नल मंडलों के 14 गांवों जैसे लिंगमपल्ली, किश्तमपेट, सुद्दाला, कोठापल्ली, राजाराम, लिंगन्नापेट, बोप्परम, कोंडामपेट, परुपेली, पिन्नाराम, एर्रायिपेट, एडुलाबंधम, मुल्कालापेट और मन्नेगुड़ा में रहने वाले आदिवासी दशकों से तसर कोकून की खेती करते आ रहे हैं.

करीब 100 साल पुरानी यह परंपरा सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि उनकी पहचान और जीवन का हिस्सा है. वे जंगलों में जाकर पेड़ों की पत्तियों पर रेशम के कीड़े पालते हैं और कोकून तैयार करते हैं.

पहली बार लगा प्रतिबंध

इस बार वन विभाग ने प्राणहिता वन्यजीव अभयारण्य के अंदर कोकून की खेती की अनुमति नहीं दी. अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील है, इसलिए यहां किसी भी तरह की मानवीय गतिविधि को सीमित करना जरूरी है. हालांकि यह फैसला आदिवासियों के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब उन्हें इस काम से रोका गया है.

आदिवासी परिवारों की चिंता

तेलंगाना टुडे के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पास आय का यही एक मुख्य साधन है. अगर उन्हें जंगल में कोकून उगाने की अनुमति नहीं मिली, तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. एक बुजुर्ग आदिवासी ने कहा, “हम सालों से यही काम करते आ रहे हैं. अब अगर हमें रोका जाएगा, तो हम क्या करेंगे?” यह चिंता सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की है.

सरकार ने दिया विकल्प, लेकिन आसान नहीं

वन विभाग ने यह भी कहा है कि आदिवासियों को पूरी तरह से काम से वंचित नहीं किया जाएगा. इसके लिए अभयारण्य के बाहर करीब 3,000 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है, जहां वे कोकून की खेती कर सकते हैं. कोटापल्ली, चेनूर और नीलवाई क्षेत्रों में इस जमीन का सर्वे किया जा रहा है. वन और सेरिकल्चर विभाग मिलकर एक माइक्रो प्लान तैयार कर रहे हैं, ताकि खेती व्यवस्थित तरीके से हो सके. लेकिन आदिवासियों का कहना है कि नई जगह पर काम शुरू करना आसान नहीं होगा. वहां पेड़, माहौल और सुविधाएं अलग होंगी, जिससे शुरुआत में काफी मुश्किलें आएंगी.

जोखिम भरा काम, लेकिन यही सहारा

तसर कोकून की खेती आसान नहीं होती. इसके लिए आदिवासियों को जंगल में कई दिनों तक रहना पड़ता है. इस दौरान उन्हें जंगली जानवरों का खतरा भी झेलना पड़ता है. वे टर्मिनेलिया अर्जुना (तेल्ला मड्डी) और येरू मड्डी जैसे पेड़ों की पत्तियों पर कीड़ों को पालते हैं. बाद में इन्हीं कोकून से रेशम तैयार होता है, जिससे साड़ियां और अन्य कपड़े बनाए जाते हैं.

कितनी होती है कमाई?

इस काम से एक परिवार साल में करीब 1 लाख रुपये तक कमा लेता है. यही उनकी मुख्य आय होती है. चेनूर क्षेत्र इस उत्पादन का लगभग 50 फीसदी हिस्सा देता है, जिससे यह इलाका तसर उत्पादन के लिए बेहद अहम बन जाता है.

उत्पादन और बाजार की स्थिति

2022 में उत्पादन: 24.10 लाख कोकून
2023 में उत्पादन: 38 लाख
2024 में उत्पादन: 29.10 लाख
2024 का लक्ष्य: 60 लाख

कोकून को चेनूर के बाजार यार्ड में लाकर खुले ऑक्शन में बेचा जाता है. छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के व्यापारी यहां आकर खरीदारी करते हैं. 2023 में एक कोकून की कीमत करीब 5.10 रुपये थी, जबकि 2024 में यह बढ़कर 6.50 रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है.

संतुलन की बड़ी चुनौती

यह मामला अब दो बड़े मुद्दों के बीच संतुलन का बन गया है एक तरफ वन्यजीवों का संरक्षण और दूसरी तरफ आदिवासियों की आजीविका. सरकार और विभाग कोशिश कर रहे हैं कि दोनों के बीच संतुलन बनाया जाए, लेकिन असली चुनौती यही है कि किसी का नुकसान न हो.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

ज्ञान का सम्मान क्विज

केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी कितने रुपये तय किया है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
पुंगनूर नस्ल
विजेताओं के नाम
सुभाष चंद्र गुप्ता- किसनपुर, अमेठी, उत्तर प्रदेश

लेटेस्ट न्यूज़