Railways Mega Project: केंद्र सरकार ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इनमें एक प्रमुख प्रोजेक्ट गाजियाबाद-सीतापुर रेल लाइन और दूसरा विशाखापत्तनम-राजमुंदरी सेक्शन से जुड़ा है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य ट्रैफिक दबाव कम करना, यात्रा को तेज बनाना और माल ढुलाई को आसान करना है.
गाजियाबाद रूट पर सबसे ज्यादा दबाव
गाजियाबाद से गुजरने वाला रेलवे सेक्शन देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है. यहां हर पांच मिनट में ट्रेनें चलती हैं, जिससे भारी ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बनी रहती है. यह रूट दिल्ली, उत्तर भारत और पश्चिम भारत को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने इस सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बनाने का फैसला लिया है.
14926 करोड़ की लागत से होगा विस्तार
इस प्रोजेक्ट पर लगभग 14926 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें करीब 403 किलोमीटर लंबी नई लाइन विकसित की जाएगी. इस परियोजना के तहत 6 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जिससे कई जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण
इस प्रोजेक्ट में कई बड़े ढांचे शामिल होंगे, जैसे
- 5 मेगा ब्रिज
- 52 बड़े पुल
- 306 छोटे पुल
- 238 अंडरपास
- 9 फ्लाईओवर
कुल मिलाकर इस नेटवर्क की ट्रैक लंबाई लगभग 859 किलोमीटर होगी, जो इसे एक विशाल रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाती है.
The Government has approved two railway projects, including the Ghaziabad–Sitapur line and another near Vishakhapatnam-Rajahmundry stretch. The Ghaziabad section is highly congested, with trains operating almost every five minutes and carrying major traffic from Delhi, North and… pic.twitter.com/2Wep7nCChU
— PIB India (@PIB_India) April 18, 2026
माल ढुलाई और अर्थव्यवस्था को फायदा
इस नई लाइन से हर साल लगभग 36 मिलियन टन माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी. इससे उद्योगों और पावर प्लांट्स को बड़ी राहत मिलेगी. इसके अलावा लॉजिस्टिक्स लागत में भी करीब 2877 करोड़ रुपये की सालाना बचत होने की उम्मीद है.
पर्यावरण के लिए बड़ा कदम
रेलवे को पहले से ही सबसे ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) परिवहन माना जाता है. अनुमान के अनुसार, इससे हर साल करीब 129 करोड़ किलो CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) कम होगी. यह असर लगभग 5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान करीब 274 लाख मानव-दिवसों का रोजगार भी बनेगा. इससे स्थानीय लोगों को काम मिलेगा और आसपास के इलाकों का विकास भी तेजी से होगा.
हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी कॉरिडोर का विस्तार
सरकार ने पूर्वी तट पर हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क को भी मंजूरी दी है. यह कॉरिडोर कोलकाता से शुरू होकर ओडिशा के बालासोर, भद्रक, कटक, भुवनेश्वर, खुर्दा और बेरहामपुर होते हुए आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और चेन्नई तक पहुंचेगा. इस पूरे रूट को चार लाइनों वाले हाई कैपेसिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि भारी ट्रैफिक को आसानी से संभाला जा सके.
The Government has approved an eastern coast railway project forming part of the Howrah–Chennai High Density Network. The corridor spans from Kolkata through Odisha covering Balasore, Bhadrak, Jakhapura, Haridaspur, Cuttack, Bhubaneswar, Khurda and Berhampur, and extends into… pic.twitter.com/ba43ArBauy
— PIB India (@PIB_India) April 18, 2026
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण
इस मेगा प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य शामिल है, जैसे
- 3 मेगा ब्रिज
- 58 बड़े पुल
- 416 छोटे पुल
- 73 अंडरपास
- 3 फ्लाईओवर
- 2.7 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रेल सेक्शन
इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई लगभग 458 किलोमीटर होगी और यह हाई-स्पीड व हाई-कैपेसिटी ट्रेनों के लिए तैयार किया जा रहा है. यह प्रोजेक्ट देश के प्रमुख बंदरगाहों जैसे काकीनाडा, मछलीपट्टनम और गंगावरम को मजबूत कनेक्टिविटी देगा. इससे माल ढुलाई तेज होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा.