Jammu Kashmir News: दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और शोपियां जिलों के सेब किसानों ने प्रस्तावित रेलवे लाइन का कड़ा विरोध किया है. किसानों का कहना है कि इस परियोजना के लिए हाल ही में सर्वे शुरू किया गया और जगह-जगह निशान वाले खंभे लगा दिए गए हैं, जिससे बागवानों में चिंता बढ़ गई है. उनका मानना है कि यह रेलवे लाइन क्षेत्र के बागवानी सेक्टर के लिए बड़ा नुकसान साबित होगी.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शोपियां से जिला विकास परिषद (DDC) के सदस्य और किसानों की ओर से बनाई गई समिति के प्रमुख राजा अब्दुल वहीद ने कहा कि यह रेलवे लाइन पुलवामा को शोपियां से जोड़ने के लिए प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि अगर यह योजना लागू हुई तो पांच लाख से ज्यादा सेब के पेड़ प्रभावित होंगे और चिनार जैसे संरक्षित पेड़ों को भी नुकसान पहुंचेगा. यह लाइन कई गांवों से होकर गुजरने वाली है.
सर्वे से पहले नहीं ली गई सलाह
किसानों ने आरोप लगाया कि सर्वे से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई. वहीद ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि स्थानीय विधायक और अधिकारी भी इस परियोजना से अनजान थे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाया, तो किसान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का रुख करेंगे. पुलवामा जिले के सेब किसान गुलाम अहमद वानी ने कहा कि अगर रेलवे लाइन का प्रस्ताव लागू होता है, तो उनके बाग में लगे करीब 250 सेब के पेड़ नष्ट हो जाएंगे.
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किसान रेलवे लाइन का कर रहे विरोध
उन्होंने कहा कि यही उनके परिवार की एकमात्र आय का स्रोत है और इतने बड़े नुकसान को देखते हुए इस तरह की रेलवे लाइन की कोई जरूरत नहीं है. वानी ने कहा कि सरकारी परियोजनाएं लोगों के फायदे के लिए होती हैं, लेकिन इस मामले में इससे प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान होगा. शोपियां के विधायक शबीर अहमद कुल्ले ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे क्षेत्र की बागवानी के लिए ‘आपदा’ बताया. उन्होंने कहा कि अकेले उनके विधानसभा क्षेत्र में ही करीब 15,000 सेब के पेड़ प्रभावित होंगे. विधायक ने कहा कि वह अगले महीने जम्मू में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाएंगे.
महबूबा मुफ्ती ने उठाए सवाल
वहीं, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भूमि अधिग्रहण और बागवानों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री उमर की ‘चुप्पी’ की आलोचना की. दूसरी ओर, रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसी भी परियोजना की योजना बनाते समय बड़े सार्वजनिक हित को ध्यान में रखा जाता है.