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फरवरी-मार्च में लगाएं हाइब्रिड टमाटर, एक एकड़ से होगी लाखों की कमाई, बस इन बातों का रखे ध्यान
टमाटर की अच्छी फसल के लिए बढ़िया बीज लेना बहुत जरूरी है. कृषि विभाग के अनुसार 1546 और अधिराज जैसी हाइब्रिड किस्में अच्छी पैदावार देती हैं. ये किस्में रोगों से जल्दी प्रभावित नहीं होतीं और इनके फल मजबूत होते हैं. मजबूत फल होने से इन्हें दूर के बाजारों में भेजना आसान होता है और नुकसान भी कम होता है.
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महंगी खाद छोड़ें, छाछ अपनाएं… पौधों की सेहत में दिखेगा जबरदस्त बदलाव
छाछ में लैक्टिक एसिड, कैल्शियम, नाइट्रोजन और कई तरह के लाभकारी बैक्टीरिया मौजूद होते हैं. ये तत्व मिट्टी को जीवंत बनाते हैं. जब हम छाछ को पानी में मिलाकर पौधों में डालते हैं, तो यह मिट्टी में मौजूद अच्छे जीवाणुओं की संख्या बढ़ाती है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और वे पोषक तत्व बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाती हैं.
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महंगी खाद छोड़िए… सरसों की खली से खिल उठेगा बगीचा, जानें कैसे करें इसका इस्तेमाल
सरसों की खली में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये तीनों तत्व पौधों की बढ़वार, जड़ों की मजबूती और फूल-फल बनने के लिए बहुत जरूरी हैं. सरसों की खली सिर्फ पौधों को ही नहीं, बल्कि मिट्टी को भी मजबूत बनाती है. इसमें भरपूर जैविक पदार्थ होता है, जो मिट्टी में रहने वाले अच्छे सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देता है.
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पपीते की खेती में बड़ा नुकसान! जानें पत्तियां मुड़ने और फल झड़ने का सही इलाज
कई बार पपीते के पौधों में पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं या छोटे-छोटे फल गिरने लगते हैं. यह समस्या अगर समय पर न संभाली जाए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.
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प्रति एकड़ करोड़ों का मुनाफा दे सकती है चंदन की खेती, समझिए लागत और कानूनी शर्तें
चंदन की लकड़ी और उससे निकलने वाले तेल की मांग न सिर्फ भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हमेशा बनी रहती है. धार्मिक कार्यों, आयुर्वेद, इत्र उद्योग और कॉस्मेटिक सेक्टर में इसकी खपत बहुत अधिक है. यही कारण है कि चंदन को “धीमी खेती लेकिन बड़ी कमाई” वाली फसल कहा जाता है.
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कम पानी, कम बीज और ज्यादा कमाई-क्या है चिया सीड्स की खेती का राज?
चिया सीड्स की खेती की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है. इस फसल में न तो भारी मात्रा में खाद डालने की जरूरत पड़ती है और न ही बार-बार दवाइयों का छिड़काव करना पड़ता है. पौधों में मौजूद प्राकृतिक गंध की वजह से जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते.








