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औषधीय खेती का सुपरहिट फॉर्मूला, किसानों के लिए मुलेठी बना पैसा छापने की मशीन- ऐसे करें शुरुआत
मुलेठी को अलग-अलग इलाकों में यष्टिमधु, मधुयष्टि और लिकोरिस के नाम से भी जाना जाता है. भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इसकी जड़ों की अच्छी कीमत मिलती है. अगर किसान थोड़ी समझदारी और सही तकनीक के साथ इसकी खेती करें, तो यह फसल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती है.
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रबर की कमी से टायर फैक्ट्रियों पर लग सकता है ब्रेक, अब ATMA ने उठाए तीखे सवाल
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस समय प्राकृतिक रबर का पीक उत्पादन सीजन माना जाता है. आमतौर पर इसी दौर में बाजार में रबर की आवक सबसे ज्यादा होती है. बावजूद इसके, टायर निर्माता कंपनियां पर्याप्त मात्रा में रबर जुटाने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
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राजस्थान से यूपी तक सरसों की फसल लहलहाई, पैदावार में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान
इस सीजन में सरसों की खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में साफ तौर पर बढ़ा है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों ने सरसों की ओर ज्यादा रुझान दिखाया है. देशभर में सरसों की खेती का कुल रकबा बढ़कर करीब 89.36 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 86.57 लाख हेक्टेयर था.
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सुपारी पर WHO की कैंसर रिपोर्ट से मचा हड़कंप, CAMPCO ने सरकार से कहा- भारतीय रिसर्च पूरी होने तक न लगे रोक
भारत दुनिया का सबसे बड़ा सुपारी उत्पादक देश है. करीब 2 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुपारी की खेती, व्यापार और प्रोसेसिंग से जुड़े हुए हैं. अकेले कर्नाटक में देश की लगभग 73 प्रतिशत सुपारी पैदा होती है. ऐसे में अगर जल्दबाजी में कोई प्रतिबंध लगाया गया, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है.
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फसल पर कीड़े-मकौड़ों का हमला? तो कीटनाशक नहीं, ये प्राकृतिक तरीके अपनाइए
धीरे-धीरे किसान यह समझने लगे हैं कि अगर फसल को प्राकृतिक तरीके से सुरक्षित रखा जाए, तो न केवल मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है, बल्कि लागत भी कम होती है और पैदावार ज्यादा टिकाऊ होती है. अच्छी बात यह है कि प्रकृति ने खुद हमें ऐसे कई उपाय दिए हैं, जिनसे कीटों को बिना जहर के नियंत्रित किया जा सकता है.
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पीली, लाल और मुड़ी पत्तियां क्या कहती हैं? कपास किसान समय रहते समझ लें तो बचेगा बड़ा नुकसान
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि पौधे की पत्तियां उसकी रसोई होती हैं. यहीं भोजन बनता है और यहीं से पौधे की ताकत तय होती है. अगर किसी कारण से पौधे को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, तो उसका असर सबसे पहले पत्तियों पर दिखाई देता है. रंग बदलना, सिकुड़ना, सूखना या कमजोर पड़ना – ये सब संकेत होते हैं कि फसल के भीतर कुछ गड़बड़ चल रही है.








