Milk Production: तमिलनाडु मिल्क प्रोड्यूसर्स वेलफेयर एसोसिएशन (TNMPWA) ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से अंतरिम बजट में दुग्ध एवं डेयरी विकास विभाग के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की है. एसोसिएशन के महासचिव एमजी राजेंद्रन ने कहा कि राज्य में करीब 30 लाख लोग दूध उत्पादन से जुड़े हैं, लेकिन चारे की कीमतें बढ़ने से किसानों को प्रति लीटर दूध पर 10 से 15 रुपये तक का नुकसान हो रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में रोजाना करीब 3 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसमें से 45 लाख लीटर घरेलू उपयोग के लिए रखा जाता है और शेष 2.55 करोड़ लीटर बिक्री के लिए जाता है.
उन्होंने कहा कि कुल उत्पादन में से करीब 37 लाख लीटर दूध (12.5 फीसदी) आविन (Aavin) को और 2.18 करोड़ लीटर निजी डेयरी कंपनियों को दिया जाता है. निजी कंपनियों की तुलना में आविन द्वारा दिया जाने वाला खरीद मूल्य प्रति लीटर 2 से 5 रुपये कम है, जिससे दूध उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. एमजी राजेंद्रन ने कहा कि दूध उत्पादकों और आविन (Aavin) दोनों के हित में खरीद मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए.
रोजाना करीब 43 लाख लीटर दूध का प्रबंधन
उन्होंने कहा कि फिलहाल आविन रोजाना करीब 43 लाख लीटर दूध का प्रबंधन कर पा रहा है और उसका लक्ष्य 2026 के अंत तक इस क्षमता को बढ़ाकर 73 लाख लीटर करना है. उन्होंने कहा कि अगर खरीद मूल्य को उत्पादन लागत के बराबर किया जाए, तो इस लक्ष्य को हासिल करना आसान होगा. राजेंद्रन ने यह भी कहा कि दूसरे राज्यों से दूध खरीदना स्वीकार्य नहीं है और मुख्यमंत्री को तमिलनाडु के किसानों के हित में खरीद मूल्य बढ़ाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री स्टालिन प्रति लीटर दूध पर 12 रुपये की प्रोत्साहन राशि की घोषणा करें और दुग्ध एवं डेयरी विकास विभाग के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित करें. उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य के 30 लाख दूध उत्पादक सरकार के समर्थन में खड़े होंगे.
किसानों को प्रोत्साहन राशि नहीं मिली
वहीं, पिछले हफ्ते खबर सामने आई थी कि तमिलनाडु में करीब 4 लाख डेयरी किसानों को पिछले चार महीनों से आविन के जरिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है. इसका कारण सरकार की ओर से फंड जारी होने में देरी बताई जा रही है. किसान सरकार से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लंबित राशि जल्द देने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई गांव स्तर की दुग्ध सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं और मई 2021 में दूध के दाम 3 रुपये प्रति लीटर घटाने के बाद आविन को हर साल करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. किसानों ने मांग की कि जैसे परिवहन निगमों को मुआवजा मिलता है, वैसे ही आविन के नुकसान की भरपाई भी की जाए.