तेलंगाना में खेती के पैटर्न में धीरे-धीरे बदलाव दिखाई दे रहा है. राज्य सरकार किसानों को पानी ज्यादा खपत करने वाली धान की खेती से हटकर ऑयल पाम (ताड़ तेल) की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह पिछले कुछ वर्षों में पाम ऑयल की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी है. जानकारी के अनुसार पिछले 10 वर्षों में पाम ऑयल की कीमत लगभग 80 प्रतिशत बढ़कर 12,000 रुपये प्रति टन से 21,546 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है. बढ़ती कीमतों और सरकार की नई योजनाओं के कारण किसानों का झुकाव इस फसल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.
ऑयल पाम की खेती बढ़ाने का लक्ष्य
बिजनेसलाइन की रिपोर्टके अनुसार, तेलंगाना में फिलहाल लगभग 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती की जा रही है. लेकिन राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ वर्षों में इसे बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का है. सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य में खाद्य तेल उत्पादन भी मजबूत होगा.
खेती के इस बदलाव को गति देने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे पर भी निवेश कर रही है. इसी दिशा में सिद्दीपेट जिले के नरमेट्टा गांव में लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक ऑयल पाम प्रोसेसिंग फैक्ट्री तैयार की गई है.
22 मार्च को शुरू होगा नया प्लांट
इस अत्याधुनिक प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 22 मार्च को करेंगे. इस फैक्ट्री के शुरू होने से किसानों को अपनी उपज को सीधे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है.
इस प्लांट की शुरुआती प्रोसेसिंग क्षमता 30 टन प्रति घंटा (TPH) होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 120 टन प्रति घंटा तक किया जा सकता है. इसके साथ ही यहां विजया हैदराबाद एडिबल ऑयल्स ब्रांड को समर्थन देने के लिए भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा मुख्यमंत्री इसी परियोजना से जुड़े 40 करोड़ रुपये की लागत वाले एक रिफाइनरी प्लांट की आधारशिला भी रखेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर ही तेल को प्रोसेस कर बाजार में भेजा जा सकेगा.
धान की खेती से क्यों हटना चाहते हैं किसान
तेलंगाना के कृषि, विपणन और सहकारिता मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव का कहना है कि राज्य में भूजल स्तर सुधरने के बाद धान का उत्पादन काफी बढ़ गया है. राज्य सरकार द्वारा सुपर फाइन किस्मों पर बोनस दिए जाने से किसानों ने बड़ी मात्रा में धान की खेती शुरू कर दी. हालांकि, अब धान की खरीद, भंडारण और विपणन से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं. इसके अलावा धान की फसल में कीट-रोगों का खतरा, जंगली सूअर और बंदरों से नुकसान जैसी समस्याएं भी किसानों के सामने आती हैं.
मंत्री का मानना है कि इन समस्याओं से बचने के लिए किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ना चाहिए जिनमें जोखिम कम हो और आय बेहतर हो. उनके अनुसार ऑयल पाम ऐसी ही एक फसल है, जो किसानों के लिए लंबे समय तक स्थिर आमदनी का स्रोत बन सकती है.
कीमत बढ़ाने की मांग
सरकार और किसान दोनों का मानना है कि अगर पाम ऑयल की कीमत और बढ़ाई जाए तो ज्यादा किसान इस खेती की ओर आकर्षित होंगे. मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पाम ऑयल की कीमत बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति टन की जाए, ताकि किसानों को इस फसल की ओर आने के लिए और प्रोत्साहन मिल सके.
किसानों को मिल रही उम्मीद
तेलंगाना के अविभाजित खम्मम जिले के किसान महेश रेड्डी, जो ऑयल पाम की खेती करते हैं, का कहना है कि पाम ऑयल की कीमतों में हाल के वर्षों में हुई बढ़ोतरी से किसानों का भरोसा बढ़ा है. उनका मानना है कि यदि आगामी मार्केटिंग सीजन (मई से अक्टूबर) के दौरान भी कीमतें अच्छी बनी रहती हैं तो और अधिक किसान इस फसल की खेती शुरू करेंगे.
किसानों की आय बढ़ाने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑयल पाम जैसी नकदी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. अगर खेती का क्षेत्र बढ़ता है और प्रोसेसिंग सुविधाएं मजबूत होती हैं, तो तेलंगाना आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख पाम ऑयल उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है.
सरकार का मानना है कि खेती में विविधता लाने से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि देश की खाद्य तेल की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी. आने वाले समय में ऑयल पाम की खेती तेलंगाना के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है.