बदलते मौसम में पशुपालक रहें सावधान, छोटी गलती से पशु हो सकता है बीमार.. कहीं घट ना जाए दूध उत्पादन

बदलते मौसम का असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. सही आहार, साफ पशुशाला, पर्याप्त पानी और समय पर टीकाकरण से पशु स्वस्थ रह सकते हैं. थोड़ी सावधानी अपनाकर पशुपालक नुकसान से बच सकते हैं और उत्पादन बनाए रख सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Feb, 2026 | 11:32 PM

Animal Care: मौसम जब करवट लेता है तो उसका असर सिर्फ इंसानों पर नहीं, बल्कि पशुओं पर भी साफ दिखाई देता है. कभी अचानक ठंड बढ़ जाती है, तो कभी तेज धूप और उमस परेशान करने लगती है. ऐसे में अगर समय रहते पशुओं की देखभाल में बदलाव न किया जाए, तो वे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बदलते मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी दुग्ध उत्पादन पर सीधा असर डाल सकती है. इसलिए पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे मौसम के हिसाब से अपने पशुओं की देखभाल करें.

ठंड, गर्मी और बरसात-हर मौसम की अलग चुनौती

मौसम बदलते ही पशुओं की सेहत  पर असर पड़ना शुरू हो जाता है. ठंड के दिनों में पशुओं को सर्दी, खांसी, निमोनिया और जोड़ों के दर्द की समस्या हो सकती है. अगर पशुशाला खुली और ठंडी हवा वाली हो, तो बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है. गर्मी में हालात अलग होते हैं. तेज धूप और लू के कारण पशु डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं. उनकी भूख कम हो जाती है और दूध भी घटने  लगता है. बरसात के मौसम में कीड़े-मकोड़े, त्वचा रोग और कई तरह की संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं. इसलिए हर मौसम में अलग तरह की सावधानी जरूरी है.

पशुशाला की व्यवस्था में करें जरूरी बदलाव

मौसम के हिसाब से पशुशाला में बदलाव करना बहुत जरूरी है. ठंड के समय पशुओं को ठंडी हवा से बचाना चाहिए. फर्श पर सूखा बिछावन रखना चाहिए ताकि नमी न रहे. गर्मी में पशुओं को छायादार जगह मिले, इसका खास ध्यान रखें. साफ और ठंडा पानी हमेशा उपलब्ध होना चाहिए. अगर संभव हो तो दिन में एक-दो बार पानी का छिड़काव करने से भी राहत मिलती है. बरसात में पशुशाला में पानी जमा न हो, यह देखना जरूरी है. गंदगी और कीचड़ से संक्रमण फैल सकता है. इसलिए साफ-सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए.

खान-पान में लापरवाही न करें

बदलते मौसम में पशुओं के खाने-पीने का भी खास ध्यान रखना चाहिए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार  देना जरूरी है. खनिज मिश्रण और नमक का नियमित सेवन पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. ठंड में गुनगुना पानी पिलाने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन भी अच्छा रहता है. गर्मी में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें. अगर पशु पर्याप्त पानी नहीं पिएंगे, तो दूध की मात्रा कम हो सकती है. साफ और ताजा चारा देना चाहिए. बासी या गीला चारा कई बार पेट की बीमारियां बढ़ा देता है.

समय पर टीकाकरण और सफाई है जरूरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पशुओं को बीमारियों  से बचाने के लिए समय-समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाएं देना जरूरी है. इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. पशुशाला की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है. गोबर और गंदगी को समय पर हटाना चाहिए, ताकि संक्रमण न फैले. अगर किसी पशु में खांसी, बुखार, भूख न लगना या सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

अगर पशु स्वस्थ रहेंगे तो दुग्ध उत्पादन  भी स्थिर रहेगा. लेकिन लापरवाही बरतने पर दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए बदलते मौसम में थोड़ी-सी अतिरिक्त सावधानी अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है.

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Published: 15 Feb, 2026 | 11:32 PM

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