Basmati Export: ऑस्ट्रेलिया ने भारत की फ्यूमिगेशन (कीट नियंत्रण) सेवाएं देने वाली 44 कंपनियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं. यह कार्रवाई ऑस्ट्रेलिया की बायोसिक्योरिटी एजेंसी की ऑडिट रिपोर्ट के बाद की गई है. निलंबित कंपनियों में हरियाणा की 5 और पंजाब की 3 कंपनियां भी शामिल हैं. इस फैसले के बाद भारत से ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने वाले कुछ कृषि और अन्य उत्पादों के निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है. यदि किसी खेप (कंसाइनमेंट) का फ्यूमिगेशन निलंबित कंपनी ने किया है, तो ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद उसका दोबारा फ्यूमिगेशन कराना होगा. इसका अतिरिक्त खर्च निर्यातकों को उठाना पड़ सकता है. साथ बासमती निर्यात भी प्रभावित हो सकता है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो कंटेनर पहले से रास्ते में हैं, उन्हें भी इस नियम से छूट नहीं मिलेगी. यानी अगर उनका फ्यूमिगेशन किसी निलंबित सेवा प्रदाता ने किया है, तो ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर दोबारा फ्यूमिगेशन अनिवार्य होगा. ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर दोबारा फ्यूमिगेशन कराने से भारतीय निर्यातकों का खर्च काफी बढ़ सकता है. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक कंटेनर पर दोबारा फ्यूमिगेशन का खर्च 700 से 1,200 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 46,000 से 79,000 रुपये) तक आ सकता है.
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने 2 जुलाई को निरीक्षण किया
एक फ्यूमिगेशन कंपनी के मालिक ने कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने 2 जुलाई को निरीक्षण किया था और अगले दिन मौखिक रूप से लाइसेंस निलंबित करने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों की ओर से कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला है, लेकिन निलंबन की सूची ऑस्ट्रेलियाई प्राधिकरण की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है. ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले से 100 से ज्यादा बासमती चावल के कंटेनर प्रभावित हो सकते हैं. एक निर्यातक के मुताबिक, एक कंटेनर की कीमत करीब 22,000 अमेरिकी डॉलर होती है. ऐसे में करीब 200 करोड़ रुपये के बासमती चावल के निर्यात पर असर पड़ सकता है. इन खेपों को या तो ऑस्ट्रेलिया में दोबारा फ्यूमिगेशन कराना होगा या फिर उन्हें अस्वीकार किए जाने का खतरा रहेगा.
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पंजाब के बासमती निर्यातकों ने चिंता जताई
ऑस्ट्रेलिया के कृषि, मत्स्य और वानिकी विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उसने केवल दस्तावेजों के आधार पर मंजूरी देने की व्यवस्था छोड़कर निरंतर निगरानी और औचक निरीक्षण (सरप्राइज ऑडिट) की व्यवस्था अपनाई है. ऑस्ट्रेलिया की जैव सुरक्षा (बायोसिक्योरिटी) प्रणाली दुनिया की सबसे सख्त व्यवस्थाओं में मानी जाती है. ऐसे में प्रक्रिया में छोटी-सी चूक होने पर भी लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है. वहीं, इस घटनाक्रम के बाद हरियाणा और पंजाब के बासमती निर्यातकों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि दोबारा फ्यूमिगेशन कराने से निर्यात लागत बढ़ जाएगी. इस मामले को उन्होंने एपीडा (APEDA) और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सामने भी उठाया है, क्योंकि फ्यूमिगेशन की निगरानी कृषि मंत्रालय के प्लांट क्वारंटीन विंग के तहत होती है.
क्या है फ्यूमिगेशन?
फ्यूमिगेशन कृषि उत्पादों को कीटों से सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है. इसमें मिथाइल ब्रोमाइड और एल्यूमिनियम फॉस्फाइड जैसी गैसों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि भंडारण या परिवहन के दौरान फसल में कीट न लगें. लंबी समुद्री यात्रा के दौरान कीट लगने का खतरा रहता है, इसलिए कई देशों में आयात से पहले फ्यूमिगेशन अनिवार्य होता है. वहीं, भारत से ऑस्ट्रेलिया को हर साल 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 4,300 करोड़ रुपये) से अधिक के कृषि उत्पादों का निर्यात होता है. पिछले वित्त वर्ष में यह निर्यात करीब 4,472 करोड़ रुपये रहा. इसमें बासमती चावल सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा, जिसके बाद प्रोसेस्ड खाद्य उत्पाद और मसालों का स्थान है.