किसानों की बढ़ी खरीदारी से ट्रैक्टर बाजार हुआ गुलजार, घरेलू मांग और निर्यात में 45 प्रतिशत की उछाल

इस बार ट्रैक्टर बिक्री को आगे बढ़ाने में महाराष्ट्र की भूमिका खास रही. राज्य में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना ने बड़ा असर दिखाया है. इस योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनें खरीदने पर 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 11 Feb, 2026 | 07:30 AM

Tractor sales: साल 2026 की शुरुआत भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए बेहद शानदार रही है. जनवरी महीने में ट्रैक्टरों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. घरेलू मांग और निर्यात—दोनों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से कुल बिक्री में सालाना आधार पर 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह आंकड़ा बताता है कि गांवों में खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियां तेज हो रही हैं और किसानों का भरोसा फिर से मजबूत हो रहा है.

उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह तेजी अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कई ठोस वजहें हैं जैसे जीएसटी में कटौती, सामान्य मानसून, किसानों की आय में सुधार और सरकार की सब्सिडी योजनाएं. इन सभी कारणों ने मिलकर ट्रैक्टर बाजार को नई ऊर्जा दी है.

घरेलू बिक्री में मजबूती, किसानों का बढ़ा भरोसा

जनवरी 2026 में ट्रैक्टरों की घरेलू बिक्री में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसका सीधा मतलब है कि देश के किसान बड़ी संख्या में नए ट्रैक्टर खरीद रहे हैं या पुराने ट्रैक्टरों को बदल रहे हैं. इस तेजी की सबसे बड़ी वजह जीएसटी में कटौती मानी जा रही है, जिससे ट्रैक्टर खरीदना पहले की तुलना में सस्ता हुआ है. इसके अलावा बीते मानसून का सामान्य रहना भी किसानों के लिए राहत भरा रहा, जिससे फसल अच्छी हुई और उनकी जेब में पैसा आया.

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से बेहतर दाम मिले हैं, जिससे गांवों में नकदी की स्थिति सुधरी है. इसका असर सीधे ट्रैक्टर जैसी बड़ी खरीद पर दिखा है.

महाराष्ट्र बना ग्रोथ का बड़ा केंद्र

इस बार ट्रैक्टर बिक्री को आगे बढ़ाने में महाराष्ट्र की भूमिका खास रही. राज्य में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना ने बड़ा असर दिखाया है. इस योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनें खरीदने पर 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों को.

उद्योग अधिकारियों का कहना है कि अगर महाराष्ट्र को आंकड़ों से अलग कर दें, तब भी ट्रैक्टर बाजार में 20 प्रतिशत से ज्यादा की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है. यह बताता है कि पूरे देश में खेती के लिए मशीनों की जरूरत और मांग लगातार बढ़ रही है.

40–50 हॉर्स पावर ट्रैक्टरों की बढ़ी मांग

जनवरी में सबसे ज्यादा मांग 40 से 50 हॉर्स पावर वाले ट्रैक्टरों की रही. इस सेगमेंट के ट्रैक्टर ज्यादा ताकतवर होते हैं और खेती के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक कामों में भी इस्तेमाल किए जाते हैं. जानकारों के अनुसार किसान अब ऐसे ट्रैक्टर खरीदना पसंद कर रहे हैं, जो एक से ज्यादा काम कर सकें और उनकी उत्पादकता बढ़ा सकें.

निर्यात बाजार से भी आई अच्छी खबर

सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि निर्यात में भी 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह लगातार तीसरा महीना है जब ट्रैक्टर निर्यात ने मजबूत प्रदर्शन किया है. अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों से ट्रैक्टरों की मांग बढ़ी है. इन क्षेत्रों में खेती के लिए भारतीय ट्रैक्टरों को भरोसेमंद और किफायती माना जाता है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इन बाजारों में ऑर्डर दोबारा आने लगे हैं और डीलर स्तर पर स्टॉक भी भरा जा रहा है, जिससे निर्यात को मजबूती मिली है.

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Published: 11 Feb, 2026 | 07:30 AM
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