ट्रैक्टर लोन की EMI बनी बोझ? तो इन आसान तरीकों से घटाएं किस्त और बचाएं ब्याज

खेती पूरी तरह मौसम और फसल पर निर्भर होती है. कभी बारिश कम हो जाती है, कभी ज्यादा हो जाती है, तो कभी कीट और रोग फसल खराब कर देते हैं. ऐसे में आय अनिश्चित रहती है और ट्रैक्टर लोन की किस्तें भारी लगने लगती हैं. लेकिन अगर कुछ समझदारी भरे तरीके अपनाए जाएं, तो ट्रैक्टर लोन की किस्त भी कम की जा सकती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 28 Jan, 2026 | 12:24 PM

Tractor loan EMI: आज के समय में ट्रैक्टर किसानों के लिए सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि खेती की रीढ़ बन चुका है. जुताई से लेकर बुवाई, ढुलाई और कटाई तक, ट्रैक्टर से खेती के कई काम आसान हो जाते हैं. यही वजह है कि अब किसान नए ही नहीं, बल्कि पुराने ट्रैक्टर भी लोन पर खरीदना पसंद कर रहे हैं. लोन से ट्रैक्टर तो मिल जाता है, लेकिन इसके बाद हर महीने किस्त चुकाने की चिंता किसानों को परेशान करने लगती है.

खेती पूरी तरह मौसम और फसल पर निर्भर होती है. कभी बारिश कम हो जाती है, कभी ज्यादा हो जाती है, तो कभी कीट और रोग फसल खराब कर देते हैं. ऐसे में आय अनिश्चित रहती है और ट्रैक्टर लोन की किस्तें भारी लगने लगती हैं. लेकिन अगर कुछ समझदारी भरे तरीके अपनाए जाएं, तो ट्रैक्टर लोन की किस्त भी कम की जा सकती है और ब्याज में भी अच्छी बचत हो सकती है.

लोन लेते समय बड़ी किस्त का चुनाव

जब किसान ट्रैक्टर लोन लेते हैं, तो अक्सर कम मासिक किस्त चुनते हैं ताकि हर महीने बोझ कम लगे. लेकिन इसका नुकसान यह होता है कि लोन की अवधि लंबी हो जाती है और ज्यादा समय तक ब्याज देना पड़ता है. अगर शुरुआत में ही थोड़ी बड़ी किस्त तय की जाए, तो लोन जल्दी खत्म हो जाता है.

बड़ी किस्त का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ब्याज कम समय के लिए देना पड़ता है. इससे कुल ब्याज राशि घट जाती है और किसान को लंबे समय तक कर्ज में नहीं रहना पड़ता.

ज्यादा डाउन पेमेंट से कैसे घटती है EMI

अगर किसी किसान को बड़ी किस्त चुकाने में परेशानी महसूस होती है, तो वह ट्रैक्टर खरीदते समय ज्यादा डाउन पेमेंट करने का विकल्प चुन सकता है. ज्यादा डाउन पेमेंट करने से लोन की कुल राशि कम हो जाती है.

जब लोन कम होगा, तो मासिक किस्त भी अपने आप कम हो जाएगी. साथ ही ब्याज की गणना भी कम रकम पर होगी, जिससे कुल ब्याज में अच्छी खासी बचत हो सकती है. यह तरीका उन किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जिनके पास शुरुआत में कुछ बचत होती है.

स्टेप-अप EMI किसानों के लिए सही विकल्प

किसानों की आय पूरे साल एक जैसी नहीं रहती. कुछ महीनों में आय बहुत कम होती है, जबकि फसल कटाई और बिक्री के समय आमदनी अच्छी हो जाती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्टेप-अप EMI का विकल्प दिया जाता है.

इस व्यवस्था में किसान कम आमदनी वाले महीनों में कम किस्त भर सकता है और जिन महीनों में फसल बेचकर पैसा मिलता है, उन महीनों में ज्यादा किस्त चुका सकता है. इससे लोन चुकाना आसान हो जाता है और किसान पर आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ता.

सरकारी सब्सिडी से कैसे घटेगा लोन का बोझ

कई राज्य सरकारें और केंद्र सरकार किसानों को ट्रैक्टर खरीदने पर सब्सिडी देती हैं. यह सब्सिडी सीधे ट्रैक्टर की कीमत घटाने में मदद करती है, जिससे किसान को कम लोन लेना पड़ता है.

अगर किसान सही समय पर सरकारी योजनाओं की जानकारी ले लें और आवेदन करें, तो उन्हें अच्छी-खासी सब्सिडी मिल सकती है. इससे न सिर्फ लोन की राशि कम होती है, बल्कि मासिक किस्त और ब्याज दोनों में राहत मिलती है.

समय से किस्त भरना क्यों है सबसे जरूरी

कई बार किसान किस्त देर से भर देते हैं, जिससे पेनल्टी और अतिरिक्त ब्याज लग जाता है. इससे लोन और महंगा हो जाता है. अगर किस्त समय पर भरी जाए, तो अतिरिक्त चार्ज से बचा जा सकता है.

समय पर भुगतान करने से बैंक या फाइनेंस कंपनी का भरोसा भी बना रहता है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर लोन से जुड़ी सुविधा आसानी से मिल जाती है.

समझदारी से लिया गया फैसला देगा राहत

ट्रैक्टर लोन किसानों के लिए जरूरी है, लेकिन इसे सही तरीके से लेना और चुकाना भी उतना ही जरूरी है. सही किस्त चुनना, ज्यादा डाउन पेमेंट करना, स्टेप-अप EMI अपनाना और सरकारी सब्सिडी का लाभ लेना, ये सभी तरीके मिलकर ट्रैक्टर लोन का बोझ काफी हद तक कम कर सकते हैं.

अगर किसान शुरुआत में ही सही योजना बना लें, तो ट्रैक्टर उनकी खेती को आगे बढ़ाने का साधन बनेगा, न कि चिंता का कारण.

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Published: 28 Jan, 2026 | 12:08 PM

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