Wheat Farming : इस समय खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल को देखकर किसान खुश होते हैं, लेकिन कई जगहों पर पत्तियों का अचानक पीला पड़ना चिंता बढ़ा रहा है. जिन किसानों ने नवंबर में गेहूं की बुवाई की थी, उनकी फसल अब 25 से 30 दिन की हो चुकी है. इसी दौरान पहली सिंचाई का समय आता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अवस्था में थोड़ी सी लापरवाही भी फसल की बढ़वार और उत्पादन पर भारी पड़ सकती है. ठंड, कोहरा और ज्यादा नमी के कारण गेहूं में बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पत्तियां पीली दिखने लगती हैं.
पहली सिंचाई और पोषण की कमी बन रही बड़ी वजह
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि गेहूं में पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन के भीतर करना बहुत जरूरी होता है. लेकिन कई बार किसान सिंचाई तो कर देते हैं, पर उसके बाद खाद और उर्वरक देना भूल जाते हैं या सही मात्रा में नहीं डालते. इससे पौधों को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता और पत्तियों में पीलापन आने लगता है. गेहूं की इस अवस्था में नाइट्रोजन, जिंक, सल्फर और आयरन जैसे तत्व बहुत जरूरी होते हैं. इनकी कमी होने पर पौधा कमजोर हो जाता है और बढ़वार रुक जाती है.
बीमारियां और पानी भराव भी बढ़ा रहे परेशानी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समय गेहूं की फसल में पीला रतुआ, पत्ती झुलसा, जड़ सड़न और करपा जैसी बीमारियों का खतरा भी रहता है. ठंड और कोहरे के कारण रोग तेजी से फैलते हैं. इसके अलावा, अगर पहली सिंचाई के बाद खेत में पानी ज्यादा देर तक भरा रहता है, तो जड़ों को नुकसान पहुंचता है. इससे पौधा पोषक तत्व नहीं ले पाता और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं. इसलिए खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था होना बेहद जरूरी है.
समय पर ये उपाय अपनाएं, फसल रहेगी हरी-भरी
अगर किसान समय रहते कुछ जरूरी कदम उठा लें, तो गेहूं की फसल को पीलापन से बचाया जा सकता है. पहली सिंचाई के बाद संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरक का प्रयोग करें. जरूरत पड़ने पर प्रति एकड़ जिंक का उपयोग फायदेमंद माना जाता है. खेत का नियमित निरीक्षण करें, ताकि बीमारी के लक्षण शुरुआत में ही पकड़ में आ जाएं. अगर पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे दिखें, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का छिड़काव करें. साथ ही, खेत में पानी रुकने न दें. सही समय पर देखभाल करने से गेहूं की फसल स्वस्थ रहती है और अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है.