अनानास के दामों ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, कम पैदावार और जबरदस्त मांग से किसानों की हुई चांदी

इस बार अनानास की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ एक वजह से नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. उत्तर भारत में इस बार सर्दी का मौसम अपेक्षाकृत छोटा रहा और गर्मी ने जल्दी दस्तक दे दी. जैसे ही तापमान बढ़ा, वैसे ही रसीले और ठंडक देने वाले फलों की मांग भी बढ़ने लगी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 7 Feb, 2026 | 08:20 AM

Pineapple prices India: पिछले कुछ दिनों से बाजार में अनानास की चर्चा जोरों पर है. वजह साफ है इसके दामों में आई तेज उछाल. जो अनानास कुछ समय पहले तक सामान्य कीमत पर बिक रहा था, वही अब 50 से 52 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है. यह कीमतें पिछले करीब दस सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर मानी जा रही हैं. अचानक बढ़े दामों ने जहां उपभोक्ताओं को चौंकाया है, वहीं अनानास उगाने वाले किसानों के लिए यह राहत और खुशी की खबर बनकर आई है.

मांग ने बदला बाजार का मिजाज

इस बार अनानास की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ एक वजह से नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. उत्तर भारत में इस बार सर्दी का मौसम अपेक्षाकृत छोटा रहा और गर्मी ने जल्दी दस्तक दे दी. जैसे ही तापमान बढ़ा, वैसे ही रसीले और ठंडक देने वाले फलों की मांग भी बढ़ने लगी. अनानास, जो गर्मियों में खूब पसंद किया जाता है, इस मांग का बड़ा फायदा उठा रहा है.

इसके साथ ही शादी-विवाह का सीजन भी शुरू हो चुका है. आयोजनों में फलों की खपत बढ़ जाती है और अनानास अब कई जगहों पर सेब और संतरे का विकल्प बनता जा रहा है. दूसरे फलों के दाम पहले से ही ऊंचे होने के कारण उपभोक्ता और व्यापारी दोनों का रुझान अनानास की ओर बढ़ा है.

उत्पादन में कमी ने बढ़ाया दबाव

मांग के मुकाबले आपूर्ति कमजोर होने से कीमतें और तेजी से ऊपर गई हैं. अनानास के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों से बारिश न के बराबर हुई है. दिसंबर के बाद से कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए, जिससे फसल पर सीधा असर पड़ा. तेज गर्मी के कारण पौधों का विकास प्रभावित हुआ और फल का आकार भी कई जगह अपेक्षा से छोटा रह गया.

इस साल अनानास का कुल उत्पादन करीब 6.25 लाख टन रहने का अनुमान है, जो सामान्य वर्षों की तुलना में कम माना जा रहा है. जब बाजार में माल कम और मांग ज्यादा होती है, तो कीमतों का बढ़ना स्वाभाविक हो जाता है.

सड़कों ने खोली बाजार की राह

अनानास की बढ़ती मांग के पीछे एक अहम वजह बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था भी है. हाल के वर्षों में हाईवे और लॉजिस्टिक्स में सुधार हुआ है, जिससे अनानास अब दक्षिण भारत से उत्तर भारत के बड़े बाजारों तक तीन दिन में पहुंच रहा है. पहले यही सफर पांच से छह दिन लेता था. कम समय में फल पहुंचने से उसकी ताजगी बनी रहती है और व्यापारी ज्यादा दाम देने को तैयार रहते हैं. इससे किसानों को भी बेहतर कीमत मिल रही है.

रमजान से और बढ़ेगी खपत

फरवरी के मध्य से रमजान का महीना शुरू होने वाला है और मार्च तक चलेगा. इस दौरान अनानास की खपत और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि कई जगह इफ्तार में इसका इस्तेमाल आम है. जूस, फलों की प्लेट और मिठाइयों में अनानास की मांग खास तौर पर बढ़ जाती है. बाजार जानकारों का मानना है कि रमजान के दौरान कीमतों में और मजबूती देखने को मिल सकती है.

मजदूरों की कमी भी बनी चुनौती

जहां एक ओर दाम बढ़ने से किसान खुश हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ परेशानियां भी सामने आ रही हैं. कई अनानास उत्पादक क्षेत्रों में मजदूरों की भारी कमी महसूस की जा रही है. दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों की वापसी के कारण कटाई और तुड़ाई का काम समय पर नहीं हो पा रहा है. अनानास एक ऐसा फल है, जिसे सही समय पर तोड़ना बेहद जरूरी होता है. देरी होने पर गुणवत्ता पर असर पड़ता है, जिससे किसानों को नुकसान भी हो सकता है.

फिलहाल बाजार के संकेत यही बता रहे हैं कि अनानास की कीमतें निकट भविष्य में ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं. मांग मजबूत है और उत्पादन सीमित. अगर मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और बारिश का इंतजार लंबा खिंचा, तो आपूर्ति और घट सकती है. ऐसे में किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना बनी रहेगी, जबकि उपभोक्ताओं को जेब थोड़ी ढीली करनी पड़ सकती है.

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