India agriculture logistic: खेती की पूरी मेहनत अक्सर एक ही बात पर टिक जाती है बीज, खाद और कीटनाशक सही है या नहीं. अगर इनमें गड़बड़ी हुई तो किसान की लागत डूबती है और फसल पर सीधा असर पड़ता है. इसी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए अब सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो खेत से लेकर लैब तक पूरे सिस्टम को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है. कृषि मंत्रालय और डाक विभाग के बीच हुए नए समझौते से अब बीज, खाद और कीटनाशकों के सैंपल की आवाजाही पूरी तरह ट्रैक की जा सकेगी.
खेती के इनपुट पर अब रहेगी डिजिटल निगरानी
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और भारतीय डाक के बीच हुए इस समझौते का मकसद है कि बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के नमूने जहां से लिए जाएं, वहां से लेकर जांच प्रयोगशाला तक उनकी हर गतिविधि दर्ज हो. यह पूरी व्यवस्था फेसलेस होगी, यानी मानवीय दखल कम होगा और डिजिटल ट्रैकिंग ज्यादा. इससे न केवल सैंपल सुरक्षित रहेंगे, बल्कि समय पर जांच भी पूरी हो सकेगी.
कैसे बदलेगा सैंपल जांच का तरीका
अब तक सैंपल भेजने की प्रक्रिया में देरी, छेड़छाड़ या रिकॉर्ड की कमी जैसी शिकायतें आती थीं. नई व्यवस्था में सैंपल विशेष पैकेजिंग के साथ भेजे जाएंगे, जिन पर क्यूआर कोड आधारित पहचान होगी. डाक विभाग इन्हें तय समय सीमा में प्रयोगशाला तक पहुंचाएगा. हर चरण की जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगी, जिससे पता चलेगा कि सैंपल कब लिया गया, कहां भेजा गया और जांच कब पूरी हुई.
किसानों के हित में क्यों है यह फैसला
राज्यसभा में जानकारी देते हुए कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि इस पहल से घटिया और नकली कृषि इनपुट पर लगाम लगेगी. इससे किसान को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद मिल सकेंगे. जब इनपुट सही होंगे तो फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगी. सरकार का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ने से बाजार में भरोसा भी मजबूत होगा और किसानों का आर्थिक नुकसान कम होगा.
नकली बीज-खाद पर कसेगा शिकंजा
समझौते पर हस्ताक्षर के समय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नकली और घटिया बीज-खाद किसानों के लिए सबसे बड़ा धोखा हैं. यह नई व्यवस्था सैंपल जांच को तेज और भरोसेमंद बनाएगी, जिससे दोषी कंपनियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई संभव हो सकेगी. कानूनी प्रक्रिया भी उसी कानून के तहत चलेगी, जिसके अंतर्गत संबंधित उत्पाद आता है.
बीज कानून से मिलेगा और सहारा
सरकार नए बीज विधेयक पर भी काम कर रही है, जिसमें किसानों और पारंपरिक किस्मों के हितों की रक्षा पर जोर है. गुणवत्ता नियंत्रण और ट्रैकिंग व्यवस्था मिलकर बीज बाजार को ज्यादा जवाबदेह बनाएगी. इससे किसानों की आजीविका सुरक्षित रखने और घटिया बीज से होने वाले जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.
मसालों के निर्यात से दिखी गुणवत्ता की ताकत
इसी कड़ी में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि हल्दी, इलायची और धनिया जैसे मसालों का निर्यात तेजी से बढ़ा है. अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने की वजह से भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में अच्छी स्वीकार्यता मिली है. यह उदाहरण बताता है कि गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी से देश की कृषि को कितनी बड़ी ताकत मिल सकती है.
खेती में भरोसे का नया दौर
कुल मिलाकर यह पहल केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि किसानों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. जब खेत में डाला जाने वाला हर बीज और खाद जांची-परखी होगी, तो किसान निश्चिंत होकर खेती कर सकेगा. डिजिटल ट्रैकिंग और डाक विभाग की मजबूत व्यवस्था के साथ अब खेती के इनपुट पर भी वही भरोसा बनेगा, जो समय पर पहुंचने वाली डाक पर होता है.