गेहूं की फसल में दूसरी सिंचाई और यूरिया का सही समय जान लें, दाना और पैदावार बढ़िया होगी

गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर सिंचाई और यूरिया का प्रयोग बहुत जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरी सिंचाई के कुछ दिन बाद यूरिया देने से फसल की बढ़वार तेज होती है. सही देखभाल से किसान बेहतर उत्पादन और मुनाफा पा सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 7 Feb, 2026 | 06:00 AM

Wheat Farming: गेहूं की खेती में सही समय पर सिंचाई और खाद का इस्तेमाल बहुत जरूरी होता है. थोड़ी-सी लापरवाही से फसल कमजोर पड़ सकती है और उत्पादन कम हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसान दूसरी सिंचाई और यूरिया का प्रयोग सही समय पर करें, तो दाना मोटा बनता है और पैदावार भी बेहतर होती है.

सही समय पर दूसरी सिंचाई जरूरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं की फसल  में दूसरी सिंचाई बुवाई के लगभग 40 से 45 दिन के बीच करनी चाहिए. यह समय फसल की बढ़वार के लिए बेहद अहम माना जाता है. इस दौरान पौधे तेजी से बढ़ते हैं और उन्हें पर्याप्त नमी की जरूरत होती है. किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सिंचाई हल्की हो और खेत में पानी जमा न हो. अगर पानी एक जगह खड़ा हो जाता है, तो पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. इससे फसल पीली पड़ सकती है और उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

शाम के समय सिंचाई का फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, शाम के समय सिंचाई करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. उस समय हवा कम चलती है और पानी धीरे-धीरे मिट्टी में समा जाता है. इससे खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पौधों को सही तरीके से पानी मिल पाता है. सुबह तक खेत की मिट्टी  संतुलित नमी बनाए रखती है, जिससे फसल हरी-भरी दिखाई देती है. यह तरीका पानी की बचत करने में भी मदद करता है और फसल की ग्रोथ बेहतर बनाता है.

ज्यादा पानी देना भी नुकसानदायक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जरूरत से ज्यादा सिंचाई करना भी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. अधिक पानी देने से मिट्टी बहुत नरम हो जाती है और पौधों की जड़ों की पकड़ कमजोर पड़ जाती है. ऐसी स्थिति में तेज हवा चलने पर फसल गिर सकती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए खेत में पानी निकालने  के लिए नालियों और मेड़ों की सही व्यवस्था रखना जरूरी होता है. संतुलित सिंचाई से ही फसल मजबूत और स्वस्थ बनी रहती है.

यूरिया का सही समय पर प्रयोग

विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरी सिंचाई के लगभग चार दिन बाद गेहूं की फसल में यूरिया का प्रयोग करना लाभदायक होता है. इससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और फसल की हरियाली बनी रहती है. अगर फसल पीली पड़ने लगे, तो दवा का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके. सही समय पर खाद और दवा का इस्तेमाल करने से फसल मजबूत बनती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं की खेती  में समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और सही देखभाल सबसे जरूरी होती है. अगर किसान इन बातों का ध्यान रखें, तो उन्हें बेहतर पैदावार के साथ अच्छा मुनाफा भी मिल सकता है.

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Published: 7 Feb, 2026 | 06:00 AM
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